IDBI Bank के विनिवेश (Disinvestment) की प्रक्रिया में तेजी आ गई है। सरकार और LIC ने **13 जुलाई** को उच्च-स्तरीय बैठकें की हैं, ताकि बैंक में अपनी बहुमत हिस्सेदारी की बिक्री को अंतिम रूप दिया जा सके।
IDBI Bank में हिस्सेदारी बिक्री का नया अध्याय
भारतीय सरकार IDBI Bank में अपनी रणनीतिक हिस्सेदारी (Strategic Stake) बेचने की कोशिशों को तेज कर रही है। 13 जुलाई को इस मामले पर वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। इन मुलाकातों में विनिवेश पर कोर ग्रुप (Core Group of Secretaries on Disinvestment) और अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group) शामिल थे। मकसद यह है कि साल भर से अटकी बिक्री प्रक्रिया की बाधाओं को दूर किया जा सके।
हिस्सेदारी कितनी, किसका नियंत्रण?
इस सौदे के तहत, सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी बेचेंगे, साथ ही बैंक का मैनेजमेंट कंट्रोल (Management Control) भी खरीदार को सौंपा जाएगा। वर्तमान योजना के अनुसार, सरकार अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी कम करेगी। अभी इन दोनों के पास बैंक की करीब 95% हिस्सेदारी है। सरकार के लिए यह डील एसेट मोनेटाइजेशन (Asset Monetization) के लक्ष्यों को हासिल करने में एक बड़ा कदम साबित होगी।
वैल्यूएशन (Valuation) और बिड की मुश्किलें
पहले इस विनिवेश प्रक्रिया में सरकार की उम्मीदों और शॉर्टलिस्ट किए गए खरीदारों, जैसे Fairfax India Holdings और Emirates NBD, की शुरुआती बोलियों के बीच वैल्यूएशन का फासला एक बड़ी रुकावट बना था। खबरों के मुताबिक, प्रेम वाट्सा की अगुवाई वाली Fairfax India Holdings ने हाल ही में इन वैल्यूएशन संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए संशोधित बोलियां (Revised Bids) जमा की हैं। पिछली गतिरोध के बाद, कीमत के अंतर को पाटने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि डील सरकार की रिजर्व प्राइस (Reserve Price) की जरूरतों को पूरा करे, एक नई वैल्यूएशन एक्सरसाइज शुरू की गई थी।
वित्तीय स्थिति और निवेशकों के लिए अहम बातें
IDBI Bank ने हाल के वर्षों में अपने ऑपरेशनल ढांचे को काफी सुधारा है। 2021 में यह RBI के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (Prompt Corrective Action - PCA) फ्रेमवर्क से बाहर निकला था, जिसने इसकी लोन देने की गतिविधियों पर रोक लगाई हुई थी। RBI की निगरानी से बाहर आने के बाद से, बैंक ने अपने लोन बुक की क्वालिटी और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins) को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। अब निवेशक इन बैठकों की प्रगति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, यह देखने के लिए कि क्या सरकार और संभावित खरीदार कीमत पर अंतिम सहमति पर पहुंच पाते हैं।
इन उच्च-स्तरीय चर्चाओं का समय यह दर्शाता है कि सौदे को अंतिम रूप देने के लिए एक समन्वित प्रयास किया जा रहा है। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अपडेट किसी भी संशोधित बोलियों की स्वीकृति, रिजर्व प्राइस के अंतिम निर्धारण और सौदे के पूरा होने की समय-सीमा से संबंधित आधिकारिक घोषणाएं होंगी। इस बिक्री का सफल निष्पादन संभवतः बैंक के शासन (Governance) और दीर्घकालिक व्यापार रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा।
