सरकार Central Bank of India, UCO Bank, Punjab & Sind Bank और Indian Overseas Bank में अपनी हिस्सेदारी घटाकर **75%** करने की योजना बना रही है। अगस्त **2026** तक SEBI के नियमों का पालन करना अनिवार्य है, जिससे बाजार में शेयरों की लिक्विडिटी बढ़ेगी।
SEBI के नियमों का पालन
सरकार का मुख्य मकसद SEBI के उन नियमों को पूरा करना है, जिसके तहत लिस्टेड कंपनियों में पब्लिक शेयरहोल्डिंग कम से कम 25% होनी चाहिए। अभी तक सरकारी बैंकों को इस नियम से छूट मिली हुई थी, लेकिन यह छूट अगस्त 2026 में खत्म हो रही है। इस कदम से शेयर बाजार में इन बैंकों के उपलब्ध शेयरों की संख्या बढ़ेगी।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार यह हिस्सेदारी कैसे बेचेगी? आमतौर पर सरकार ऐसे मौकों पर Offer for Sale (OFS) या Follow-on Public Offer (FPO) का रास्ता चुनती है। बाजार में शेयरों की सप्लाई बढ़ने से शॉर्ट टर्म में कीमतों पर थोड़ा दबाव आ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी के लिहाज से यह सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
बैंकिंग सेक्टर में बड़े रिफॉर्म की तैयारी
यह केवल एक अनुपालन (compliance) का मुद्दा नहीं है, बल्कि सरकार बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि कुछ बैंकों का मर्जर और प्राइवेटाइजेशन करके एक मजबूत बैंकिंग सिस्टम तैयार किया जाए, जिसमें केवल 3 से 4 बड़े और डोमिनेंट सरकारी बैंक हों।
आगे की राह
इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार को 'Banking Companies (Acquisition and Transfer of Undertakings) Act' में बदलाव करने होंगे। निवेशकों को अब आधिकारिक घोषणाओं, बैंक-वार टाइमलाइन और हिस्सेदारी बेचने के तरीके (Sale Mechanism) पर अपनी नजरें टिकाए रखनी चाहिए।
