Goldman Sachs के टॉप अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि AI अब बैंकिंग सेक्टर की पारंपरिक हायरिंग और काम करने की पद्धति को पूरी तरह बदल रहा है। अब एंट्री-लेवल के कामों के लिए इंसानों की जरूरत कम हो रही है, जिसका सीधा असर बैंकिंग करियर के पुराने पिरामिड स्ट्रक्चर पर पड़ा है।
करियर का पारंपरिक मॉडल खत्म?
फाइनेंशियल वर्ल्ड में सालों से चला आ रहा 'करियर लैडर' अब इतिहास बनता दिख रहा है। Goldman Sachs के एशिया-पैसिफिक एग्जीक्यूटिव केविन स्नीडर ने 'Milken Institute Asia Summit' में साफ कहा कि बैंकिंग में अब वह पुराना दौर नहीं रहा, जहां जूनियर एम्प्लॉई सालों तक डेटा एंट्री और फाइनेंशियल मॉडलिंग जैसे बोरिंग काम करते थे। अब AI इन सभी कामों को चुटकियों में कर रहा है।
नई भर्ती का नया गणित
बैंक अब ऐसे रिक्रूट्स की तलाश में हैं जो शुरुआत से ही AI एजेंट्स को मैनेज करना जानते हों। इसका मतलब है कि पहले जो काम करने के लिए सैकड़ों लोगों की फौज चाहिए थी, वह अब मशीनें कर रही हैं। इससे मिडिल मैनेजमेंट की भूमिका भी कम होती जा रही है, क्योंकि रिपोर्टिंग और एनालिसिस का काम ऑटोमेटेड हो गया है।
निवेशकों के लिए डबल-एज्ड स्वॉर्ड
इन्वेस्टर्स के नजरिए से देखें, तो यह खबर अच्छी और बुरी दोनों है।
- मुनाफे का मौका: स्टाफ खर्च में कटौती से बैंक के ऑपरेटिंग मार्जिन में बड़ा सुधार हो सकता है। कम खर्च, ज्यादा एफिशिएंसी का सीधा मतलब बेहतर प्रॉफिट हो सकता है।
- भविष्य का रिस्क: एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जूनियर लेवल पर ही सब कुछ AI करेगा, तो भविष्य में बैंक को अनुभवी 'सीनियर लीडर्स' कहां से मिलेंगे? जो बुनियादी काम करके 'गट फील' (Gut feel) विकसित होता था, उसके बिना कॉम्प्लेक्स फैसले लेना मुश्किल हो सकता है।
मार्केट का हाल
Goldman Sachs का स्टॉक हाल ही में जुलाई 2026 के अपने रिकॉर्ड हाई से थोड़ा नीचे आया है। फिलहाल मार्केट की नजर इस बात पर है कि बैंक अपने खर्चों को कैसे मैनेज करता है और क्या यह AI-ड्रिवन बदलाव लॉन्ग टर्म में प्रॉफिटेबिलिटी को बनाए रख पाएगा।
