Goldman Sachs को भारतीय बाज़ारों में चुनिंदा रिकवरी की उम्मीद है, जिसका नेतृत्व बैंक और लार्ज-कैप स्टॉक्स करेंगे। कंपनी को लगता है कि वैल्यूएशन्स (Valuations) में सुधार और मैक्रोइकॉनॉमिक (Macroeconomic) हालात के स्थिर होने पर विदेशी निवेश लौट सकता है।
Goldman Sachs की India पर नई राय: बैंकिंग और लार्ज-कैप स्टॉक्स में दिखेगी तेजी!
Goldman Sachs को भारतीय बाज़ारों में चुनिंदा रिकवरी की उम्मीद है, जिसका नेतृत्व बैंक और लार्ज-कैप स्टॉक्स करेंगे। कंपनी को लगता है कि वैल्यूएशन्स (Valuations) में सुधार और मैक्रोइकॉनॉमिक (Macroeconomic) हालात के स्थिर होने पर विदेशी निवेश लौट सकता है। यह बदलाव विदेशी बिकवाली के एक दौर के बाद डोमेस्टिक-फोक्स्ड सेक्टर्स की ओर एक स्ट्रेटेजिक मूव (Strategic Move) को दर्शाता है।
बैंकिंग सेक्टर और लार्ज-कैप पर फोकस
इस आउटलुक में फाइनेंशियल सेक्टर्स (Financial Sectors) को मुख्य प्राथमिकता दी जा रही है। Goldman Sachs बैंकिंग सेक्टर को खास तौर पर आकर्षक मानता है, क्योंकि यह उचित वैल्यूएशन्स (Valuations) और पहले हुई भारी विदेशी बिकवाली के उलटफेर, दोनों का फायदा उठा सकता है। बैंकों को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज़ (NBFCs) की तुलना में मजबूत क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth), बेहतर लिक्विडिटी (Liquidity) और हेल्थी एसेट क्वालिटी (Asset Quality) के कारण फायदा होगा। मार्केट कैप के लिहाज से, कंपनी मिड-कैप्स (Mid-caps) से लार्ज-कैप स्टॉक्स (Large-cap stocks) की ओर रोटेशन (Rotation) की उम्मीद कर रही है, क्योंकि मिड-कैप्स अभी भी महंगे हैं। लार्ज-कैप्स के वैल्यूएशन्स (Valuations) लॉन्ग-टर्म एवरेज (Long-term average) के करीब आ गए हैं, जो संभावित रिटर्न के लिए एक अधिक टिकाऊ रास्ता प्रदान करते हैं।
मैक्रोइकॉनॉमिक ड्राइवर्स (Macroeconomic Drivers)
सुधरते डोमेस्टिक फैक्टर्स (Domestic Factors) इस उम्मीद के केंद्र में हैं। हालांकि, ऊंचे तेल की कीमतों और करेंसी की अस्थिरता के प्रभाव के कारण अर्निंग्स डाउनग्रेड (Earnings downgrade) का एक सामान्य दौर जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन विशिष्ट सेक्टर्स लचीलापन दिखा रहे हैं। गिरती कमोडिटी प्राइसेस (Commodity prices) और अधिक स्टेबल रुपया (Rupee) डोमेस्टिक-ओरिएंटेड कंपनियों के लिए सहायक माने जा रहे हैं। Goldman Sachs ने यह भी नोट किया है कि दूसरी तिमाही की अर्निंग्स (Earnings) की उम्मीदें पहले के मार्केट कंसर्न्स (Market concerns) से बेहतर प्रदर्शन की ओर इशारा कर रही हैं।
विदेशी निवेश का फ्लो (Foreign Investment Flows)
विदेशी निवेशकों, जिन्होंने पहले रिकॉर्ड बिकवाली के जरिए भारतीय इक्विटीज (Equities) को लिक्विडिटी (Liquidity) के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया था, ने जून के मध्य से अपने रुख में बदलाव दिखाया है। डेटा से पता चलता है कि विशेष रूप से फाइनेंशियल सेक्टर (Financial Sector) में मामूली नेट बाइंग (Net buying) की ओर झुकाव बढ़ा है। चूंकि ग्लोबल इन्वेस्टर्स (Global Investors) अभी भी भारत में काफी अंडरवेट (Underweight) हैं, Goldman Sachs का तर्क है कि अगर मार्केट कॉन्फिडेंस (Market confidence) मजबूत होना जारी रहता है तो पोर्टफोलियो बनाने की काफी गुंजाइश है।
सेक्टर प्रायोरिटीज (Sectoral Priorities) और सावधानी
कंपनी बैंकों, एनर्जी रिफाइनर्स (Energy refiners), टेक्नोलॉजी (Technology), मीडिया (Media) और टेलीकॉम (Telecom), डिफेंस (Defense) और यूटिलिटीज (Utilities) पर ओवरवेट (Overweight) पोजीशन बनाए हुए है। इसके विपरीत, एनालिस्ट्स (Analysts) एक्सपोर्टर्स (Exporters), मेटल प्रोड्यूसर्स (Metal producers) और डाउनस्ट्रीम ऑयल कंपनियों (Downstream oil companies) के बारे में सावधानी बरत रहे हैं, जिसका कारण ग्लोबल डिमांड प्रेशर (Global demand pressures) और मटेरियल कॉस्ट कंसर्न्स (Material cost concerns) हैं। इसके अतिरिक्त, टूरिज्म सेक्टर (Tourism sector) को डिमांड में सुधार के उभरते संकेतों के कारण एक संभावित रिकवरी थीम (Recovery theme) के रूप में उजागर किया गया है। इन रुझानों की प्रगति काफी हद तक रुपये की स्थिरता, विदेशी पूंजी प्रवाह की गति और क्रेडिट ग्रोथ (Credit growth) का वर्तमान उम्मीदों के अनुरूप बने रहने पर निर्भर करेगी।
