रिटेल क्रेडिट ग्रोथ में नरमी
साल 2025-26 की मार्च तिमाही में भारतीय रिटेल लेंडिंग मार्केट में त्योहारी सीजन के बाद नरमी देखी गई। रिटेल लेंडिंग पोर्टफोलियो में सालाना 16.6% की वृद्धि हुई और यह ₹170.2 लाख करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले ग्रोथ 4.6% रही, जो त्योहारी मांग के बाद सामान्य हुई क्रेडिट डिमांड को दर्शाता है।
गोल्ड लोन का दबदबा
गोल्ड लोन (Gold Loan) इस दौरान सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेगमेंट रहा। FY26 में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 50.4% बढ़ा। सोने की बढ़ती कीमतों से कोलेटरल वैल्यू (Collateral Value) बढ़ी और उधारकर्ताओं की मांग भी बनी रही। गोल्ड लोन की यह जोरदार ग्रोथ रिटेल क्रेडिट के अन्य क्षेत्रों के विपरीत है।
होम लोन और क्रेडिट कार्ड का धीमा प्रदर्शन
होम लोन (Home Loan) सेगमेंट में सालाना 9.4% की मामूली वृद्धि हुई और यह ₹44.4 लाख करोड़ तक पहुंचा। इस ग्रोथ का मुख्य कारण नए उधारकर्ताओं की संख्या में वृद्धि के बजाय औसत लोन टिकट साइज (Loan Ticket Size) का बढ़ना रहा। इसी तरह, क्रेडिट कार्ड (Credit Card) पर बकाया राशि सालाना आधार पर स्थिर रही, और पिछली तिमाही की तुलना में 1.1% की मामूली गिरावट दर्ज की गई। यह उपभोक्ताओं के कर्ज लेने को लेकर सतर्क रवैये को दिखाता है।
विवेकाधीन खर्चों में नरमी
ऑटो लोन (Auto Loan) सेगमेंट में आई गिरावट, विवेकाधीन खर्चों (Discretionary Spending) में नरमी का संकेत देती है। ऑटो लोन में पिछली तिमाही के मुकाबले 11.6% की बड़ी गिरावट आई, जिसमें दोपहिया वाहनों के लोन में 22.1% की कमी देखी गई। त्योहारी मांग कम होने के बाद कंज्यूमर ड्यूरेबल (Consumer Durable) के लिए फाइनेंसिंग में भी नरमी आई, जो गैर-जरूरी खपत में व्यापक कमी की ओर इशारा करता है।
