साल 2026 की पहली छमाही में गोल्ड ज्वैलरी पर मिले लोन में **₹1.52 लाख करोड़** की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। यह पहली बार है जब गोल्ड लोन की ग्रोथ होम लोन को पीछे छोड़ गई है। यह बदलाव दिखाता है कि लोग अब गिरवी रखकर लोन लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं, क्योंकि बैंक NBFCs और बड़ी इंडस्ट्रीज को फंड कर रहे हैं।
गोल्ड लोन की तूफानी बढ़त, होम लोन से आगे!
भारत के रिटेल लेंडिंग (Retail Lending) में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साल 2026 की पहली छमाही में, गोल्ड लोन की ग्रोथ ने होम लोन की ग्रोथ को पीछे छोड़ दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड ज्वैलरी पर दिए गए लोन ₹1,52,837 करोड़ बढ़े हैं, जबकि होम लोन में ₹1,47,454 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। यह ट्रेंड ऐतिहासिक रहा है, जहाँ पहले होम लोन ही सुरक्षित लोन में सबसे आगे रहता था।
गोल्ड लोन में इस तेज उछाल की मुख्य वजह सोने की बढ़ी हुई कीमतें हैं, जिससे घरों के पास रखे सोने की वैल्यू बढ़ गई है। ऐसे में, बैंक भी इस अस्थिर मार्केट में अपनी एसेट क्वालिटी (Asset Quality) को प्राथमिकता दे रहे हैं और इन सुरक्षित लोन प्रोडक्ट्स की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। अपने मौजूदा एसेट्स (Assets) का इस्तेमाल करके, लोग आसानी से लिक्विडिटी (Liquidity) पा रहे हैं, और बैंकों को भी कम रिस्क वाले इन लोंस से फायदा हो रहा है।
NBFCs और इंडस्ट्रीज पर फोकस
2026 की शुरुआत में क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) की कहानी में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (NBFCs) का रोल भी काफी अहम रहा है। NBFCs को बैंकों से मिला क्रेडिट ₹2,45,183 करोड़ बढ़ा है, जो कुल इंक्रीमेंटल क्रेडिट ग्रोथ का 15% से ज्यादा है। इनमें से कई NBFCs गोल्ड लोन मार्केट में बड़ा रोल निभा रही हैं, जिससे एक ऐसा स्ट्रक्चरल लिंक (Structural Link) बना है जहाँ बैंक सीधे रिटेल लोन देने के बजाय इन कंपनियों के जरिए फंड पहुंचा रहे हैं। यह स्ट्रैटेजी बैंकों को डायरेक्ट बैलेंस शीट रिस्क (Balance Sheet Risk) को मैनेज करने में मदद करती है, लेकिन यह NBFC सेक्टर की हेल्थ और उनके बोरोइंग लेवल (Borrowing Level) को रेगुलेटरी नजरिए से बहुत अहम बना देता है।
इसी के साथ, बड़ी इंडस्ट्रियल कंपनियों को ₹2,46,772 करोड़ का बड़ा क्रेडिट मिला है। इंडस्ट्रीज में लेंडिंग काफी कंसन्ट्रेटेड (Concentrated) है, जिसमें पावर सेक्टर सबसे बड़ा बेनिफिशियरी (Beneficiary) बनकर उभरा है, और इस सेगमेंट की ग्रोथ में इसका योगदान 24% रहा है। इसके अलावा, इंजीनियरिंग, बेसिक मेटल मैन्युफैक्चरिंग और पेट्रोलियम व कोल प्रोडक्ट्स इंडस्ट्रीज को भी काफी फायदा हुआ है। कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर्स (Capital-intensive sectors) में क्रेडिट का यह कंसंट्रेशन मैक्रोइकॉनोमिक डेटा (Macroeconomic Data) से भी मेल खाता है, जिसमें फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कैपिटल गुड्स प्रोडक्शन (Capital Goods Production) में 14% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ देखी गई थी।
पिछले सालों के अनसिक्योर्ड रिटेल लेंडिंग बूम (Unsecured Retail Lending Boom) की तुलना में, मौजूदा क्रेडिट माहौल सुरक्षित एसेट्स और कॉर्पोरेट कैपिटल स्पेंडिंग (Corporate Capital Spending) को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूशन (Credit Distribution) के लिए NBFCs पर निर्भरता एक सिस्टमिक कॉम्प्लेक्सिटी (Systemic Complexity) जोड़ती है। इन ट्रेंड्स पर नजर रखने वाले इन्वेस्टर्स (Investors) आने वाली तिमाही के परफॉरमेंस रिपोर्ट्स (Performance Reports) का इंतजार करेंगे, ताकि बैंकों और प्रमुख गोल्ड लोन NBFCs की एसेट क्वालिटी, कॉस्ट ऑफ फंड्स (Cost of Funds) और क्रेडिट ग्रोथ की सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) का आकलन किया जा सके।
