Gold Loans: असुरक्षित कर्ज में सुस्ती, गोल्ड लोन ने पकड़ी रफ्तार; जानें क्या हैं RBI के नए नियम

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold Loans: असुरक्षित कर्ज में सुस्ती, गोल्ड लोन ने पकड़ी रफ्तार; जानें क्या हैं RBI के नए नियम

अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच भारत में नए बैंक क्रेडिट का **13.6%** हिस्सा गोल्ड लोन से आया है, जबकि क्रेडिट कार्ड जैसे असुरक्षित कर्ज की डिमांड काफी कम हो गई है। RBI के नए LTV नियमों का असर लेंडर्स की रणनीति पर साफ दिख रहा है।

भारत में साल 2026 में गोल्ड लोन को लेकर निवेशकों और कर्जदारों का नजरिया बदल गया है। अप्रैल से जुलाई के बीच बैंकों ने गोल्ड ज्वेलरी के बदले ₹90,888 करोड़ का नया क्रेडिट बांटा है। वहीं दूसरी ओर, क्रेडिट कार्ड जैसे असुरक्षित कर्ज (Unsecured Credit) की मांग में भारी गिरावट आई है, जो इस दौरान सिर्फ ₹3,295 करोड़ ही बढ़ पाया है।

रेगुलेटरी बदलाव और नए नियम

1 अप्रैल 2026 से RBI ने गोल्ड लोन सेक्टर के लिए नया फ्रेमवर्क लागू किया है। इसके तहत अब टियर्ड लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेश्यो अनिवार्य है। नए नियमों के मुताबिक:

  • ₹2.5 लाख तक के लोन पर 85% तक LTV.
  • ₹2.5 लाख से ₹5 लाख के बीच के लोन पर 80% LTV.
  • ₹5 लाख से ऊपर के लोन पर 75% LTV तय की गई है।
    इसके अलावा, बुलेट-रिपेमेंट अवधि पर 12 महीने की कैप लगा दी गई है, ताकि सिस्टम में रिस्क को कम किया जा सके।

लेंडर्स के लिए चुनौतियां

गोल्ड लोन की बढ़ती डिमांड के बीच निवेशकों को रिस्क पर नजर रखनी चाहिए। अगर सोने की कीमतों में गिरावट आती है, तो कोलैटरल की वैल्यू कम हो सकती है, जो एसेट क्वालिटी के लिए खतरा है। साथ ही, ₹2.5 लाख से अधिक के बड़े लोन में डिफॉल्ट का रिस्क भी बना हुआ है। छोटे NBFCs के लिए अनुपालन (Compliance) का खर्च बढ़ने से उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर फिलहाल दबाव दिख रहा है।

औद्योगिक कर्ज की स्थिति

खुदरा क्षेत्र से हटकर देखें तो इंडस्ट्रियल सेक्टर में क्रेडिट डिमांड ने जोर पकड़ा है और इसमें साल-दर-साल 20% की ग्रोथ देखी गई है। बुनियादी ढांचा (Infrastructure), मेटल्स और केमिकल सेक्टर में लगभग ₹2.2 लाख करोड़ का निवेश हुआ है। हालांकि, सर्विस सेक्टर ने 22.9% की ग्रोथ दिखाई है, लेकिन नया क्रेडिट फ्लो उसकी तुलना में कम रहा है। अब निवेशकों की नजर आने वाले तिमाही नतीजों पर होगी, जहां कंपनियां गोल्ड प्राइस सेंसिटिविटी और बड़े लोन के डिफॉल्ट रेट्स पर स्थिति साफ करेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.