Gold Loan Boom: FY26 में 50% बढ़ा गोल्ड लोन, पर्सनल लोन से ऐसे शिफ्ट हुए लोग

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AuthorAditya Rao|Published at:
Gold Loan Boom: FY26 में 50% बढ़ा गोल्ड लोन, पर्सनल लोन से ऐसे शिफ्ट हुए लोग

भारत में गोल्ड लोन (Gold Loan) बाजार ने वित्त वर्ष 2026 में 50% से ज्यादा की शानदार ग्रोथ दर्ज की है। यह अब कुल कंज्यूमर क्रेडिट का 22.4% हिस्सा बन गया है। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी नए ग्राहकों से नहीं, बल्कि प्रति ग्राहक लोन की राशि बढ़ने से हुई है, क्योंकि लोग रिस्की पर्सनल लोन (Personal Loan) से दूरी बना रहे हैं।

गोल्ड लोन की कहानी: बड़े लोन, कम ग्राहक?

वित्त वर्ष 2026 में भारत का गोल्ड लोन सेक्टर जबरदस्त रफ्तार से बढ़ा है, जिसमें पोर्टफोलियो 50% से ज्यादा बढ़ा है। यह भारतीय परिवारों और छोटे बिजनेसेज के लिए फाइनेंसिंग का एक बड़ा जरिया बन गया है। अब गोल्ड लोन कुल कंज्यूमर क्रेडिट मार्केट का 22.4% हिस्सा बन चुका है। यह इसे होम लोन (जो 26.3% मार्केट शेयर के साथ टॉप पर है) के बाद दूसरा सबसे बड़ा रिटेल क्रेडिट कैटेगरी बनाता है।

क्यों बढ़ रही है लोन की रकम?

इस boom की मुख्य वजह नए ग्राहकों की भारी आमद नहीं है, बल्कि मौजूदा ग्राहकों द्वारा अपने गिरवी रखे सोने पर ज्यादा लोन लेना है। क्रेडिट ब्यूरो CRIF के आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में यूनिक गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहकों की संख्या सिर्फ 3.1% बढ़कर करीब 8.99 करोड़ हुई। असल में, पिछले पांच सालों में सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण लेंडर्स ज्यादा लोन ऑफर कर पा रहे हैं। इससे लोग उसी सोने के बदले ज्यादा फंड हासिल कर पा रहे हैं, जिससे लोन की औसत टिकट साइज बढ़ गई है।

अनसिक्योर्ड क्रेडिट से गोल्ड की ओर पलायन

गोल्ड लोन अब अनसिक्योर्ड क्रेडिट प्रोडक्ट्स जैसे पर्सनल लोन और माइक्रोफाइनेंस के मुकाबले ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। इन अनसिक्योर्ड लोन की ग्रोथ हाल के दिनों में धीमी पड़ी है। जब फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस इन लोन के लिए अपनी लैंडिंग स्टैंडर्ड्स कड़े कर रहे हैं, तो कई बरोअर्स गोल्ड-बैक्ड फाइनेंसिंग की ओर रुख कर रहे हैं। लेंडर्स के लिए यह एक कम जोखिम वाला कदम माना जा रहा है, क्योंकि ये लोन फिजिकल एसेट्स से पूरी तरह सुरक्षित होते हैं। नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (NBFCs), जो परंपरागत रूप से ऑर्गेनाइज्ड गोल्ड लोन स्पेस में हावी रही हैं, उनका मार्केट शेयर 22% है। वहीं, पब्लिक सेक्टर के लेंडर्स ने भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। उदाहरण के लिए, Canara Bank ने हाल ही में बताया कि Q1 FY27 तक उसका नॉन-एग्रीकल्चर गोल्ड लोन पोर्टफोलियो ₹1 लाख करोड़ के पार चला गया है।

सेक्टर के रिस्क और आगे क्या?

यह सेक्टर तो बढ़ रहा है, लेकिन निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इसका मॉडल सोने की कीमतों पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। अगर सोने की कीमतों में बड़ी उथल-पुथल आती है, तो लोन-टू-वैल्यू रेशियो को एडजस्ट करना होगा, जिससे बरोअर्स को मिलने वाली लोन राशि पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, चूंकि ग्रोथ नए बरोअर्स के बजाय मौजूदा ग्राहकों द्वारा कर्ज बढ़ाने से हो रही है, इसलिए लेंडर्स कुछ खास लोगों की रिपेमेंट क्षमता पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं। आगे यह देखना अहम होगा कि क्या अनसिक्योर्ड से सिक्योर्ड डेट की ओर शिफ्ट होने का यह ट्रेंड जारी रहता है, या बढ़ती ब्याज दरें आखिरकार फ्रेश क्रेडिट की मांग को कम कर देती हैं। निवेशक इस बात पर भी नजर रखेंगे कि बरोअर्स के डिफॉल्ट करने की स्थिति में बैंक और NBFCs गिरवी रखे सोने की नीलामी की प्रक्रिया को कैसे मैनेज करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.