सोने की कीमतों में आई गिरावट से Gold Loan लेने वाले परेशान हैं। भाव **₹1.82 लाख** के शिखर से फिसलकर **₹1.53 लाख** प्रति **10 ग्राम** के आसपास आ गए हैं, जिससे लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो बिगड़ रहा है और Margin Call का जोखिम बढ़ गया है।
सोने की कीमतों में आई हालिया गिरावट ने कर्जदारों की चिंता बढ़ा दी है। जनवरी में सोना ₹1.82 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर था, जो 12 अक्टूबर, 2026 तक गिरकर ₹1.53 लाख के करीब पहुंच गया है। इस गिरावट का सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिन्होंने अपना सोना गिरवी रखकर लोन लिया है।
LTV रेशियो पर बड़ा असर
पूरा मामला Loan-to-Value (LTV) रेशियो के इर्द-गिर्द घूमता है। RBI के नियमों के मुताबिक, आमतौर पर लोन की वैल्यू गिरवी रखे सोने की कीमत का अधिकतम 75% तक हो सकती है। जब सोने के दाम गिरते हैं, तो गिरवी रखे गहनों की वैल्यू कम हो जाती है, जबकि लोन की रकम वही बनी रहती है। इससे LTV रेशियो बढ़ जाता है। अगर यह लिमिट से ऊपर जाता है, तो बैंक या NBFC 'मार्जिन कॉल' जारी करते हैं, जिसका मतलब है कि आपको या तो अतिरिक्त कैश देना होगा या और सोना जमा करना होगा।
क्या है Bullet Repayment का जोखिम?
जोखिम का स्तर लोन के प्रकार पर निर्भर करता है। 'बुलेट रिपेमेंट' (Bullet Repayment) लोन, जहां ब्याज और मूलधन का भुगतान लोन की अवधि खत्म होने पर एक साथ किया जाता है, सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। इनमें लोन की राशि कम नहीं होती, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव का असर ज्यादा पड़ता है। इसके उलट, EMI वाले लोन सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि हर महीने प्रिंसिपल कम होने से LTV रेशियो नियंत्रित रहता है।
नीलामी का खतरा
अधिकतर वित्तीय संस्थान रिस्क को मैनेज करने के लिए रेगुलेटरी लिमिट से 5% से 10% कम पर काम करते हैं, ताकि झटकों को सहा जा सके। लेकिन कीमतों में लगातार गिरावट से पुराने लोन के लिए यह बफर खत्म होता जा रहा है। यदि कोई ग्राहक मार्जिन कॉल का पालन नहीं करता, तो लेंडर के पास अनुबंध के तहत आपके गिरवी रखे गहनों की नीलामी करने का अधिकार है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने लोन एग्रीमेंट को चेक करें और लेंडर के संपर्क में रहें।
