Muthoot Finance vs Manappuram Finance: गोल्ड लोन सेक्टर में तूफानी तेजी, पर किसे मिला बूस्ट?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Muthoot Finance vs Manappuram Finance: गोल्ड लोन सेक्टर में तूफानी तेजी, पर किसे मिला बूस्ट?
Overview

भारत का गोल्ड लोन सेक्टर इस वक्त ज़बरदस्त ग्रोथ दिखा रहा है, लेकिन प्रमुख फाइनेंस कंपनियों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर साफ दिख रहा है। Muthoot Finance ने शानदार नतीजे पेश किए हैं, जिनका नेट प्रॉफिट पिछले साल के मुकाबले **94.9%** बढ़कर **₹2,656 करोड़** हो गया। वहीं, Manappuram Finance के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में **56.8%** की बढ़ोतरी के बावजूद, बढ़ते खर्चों और कम यील्ड के कारण नेट प्रॉफिट **15.9%** घट गया।

प्रदर्शन का अंतर और बाजार के संकेत

गोल्ड लेंडिंग सेक्टर में यह प्रदर्शन का अंतर एक अहम बदलाव का संकेत दे रहा है। जहाँ एक तरफ सोने की बढ़ती कीमतें और लोगों की तुरंत लोन की जरूरत सेक्टर को मजबूती दे रही है, वहीं कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्जिन मैनेजमेंट उनके शेयर प्रदर्शन को तय कर रहे हैं। Muthoot Finance जिस तरह से लोन ग्रोथ को भारी मुनाफे में बदल पा रही है, वह उसे आगे रखता है। वहीं, Manappuram Finance के सामने कुछ चुनौतियां हैं, भले ही बाजार में तेजी हो।

क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

गोल्ड लोन मार्केट लगातार बढ़ रहा है। नवंबर 2025 तक कुल गोल्ड लोन ₹3.58 लाख करोड़ तक पहुंच गए थे। पिछले साल सोने की कीमतों में करीब 80% का उछाल आया, जिसने सोने को लोगों के लिए आसानी से कोलेटरल (Collateral) के तौर पर उपलब्ध कराया।

Q3FY26 में, Muthoot Finance का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 94.9% बढ़कर ₹2,656 करोड़ रहा। कंपनी का गोल्ड लोन एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 51% बढ़कर ₹1.47 लाख करोड़ हो गया। इसका नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 12.8% रहा और नेट एनपीए (Net NPA) सिर्फ 1.3% था। ये आंकड़े मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस और मार्जिन को दर्शाते हैं।

इसके विपरीत, Manappuram Finance के नतीजे मिले-जुले रहे। दिसंबर 2025 तिमाही में, गोल्ड लोन बुक 56.8% बढ़कर ₹37,144 करोड़ हो गई, लेकिन नेट प्रॉफिट 15.9% घटकर ₹381.2 करोड़ रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह रहे ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी और नेट यील्ड का गिरना। नेट यील्ड घटकर 18.5% रह गई, जो पिछले साल 22.2% थी। कंपनी का नेट एनपीए 2.2% था।

वैल्यूएशन और एनालिस्ट्स की राय

बाजार में दोनों कंपनियों को लेकर अलग-अलग राय है। Muthoot Finance, जिसका शेयर भाव करीब ₹3,933 चल रहा है, उसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो लगभग 21-22x है और मार्केट कैप ₹1.6 लाख करोड़ है। एनालिस्ट्स इसे 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) रेटिंग दे रहे हैं और टारगेट प्राइस ₹4,066.90 रखा है। इसका प्राइस-टू-बुक (P/B) वैल्यू 5.1 गुना है।

वहीं, Manappuram Finance, जिसका शेयर भाव करीब ₹302.55 है, उसका P/E रेशियो 57x से 66x के बीच है। यह इतना ऊंचा वैल्यूएशन, गिरते मुनाफे के बावजूद, इसकी रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 16% (Muthoot के 19.7% की तुलना में) और ऊंचे नेट एनपीए को देखते हुए चिंताजनक है। एनालिस्ट्स ने इसे 'होल्ड' (Hold) रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹302.50 रखा है, जो मौजूदा भाव से ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं दिखाता। इसका P/B वैल्यू 2.1 गुना है।

आगे क्या?

गोल्ड लोन का ऑर्गेनाइज्ड मार्केट मार्च 2026 तक ₹15 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। हाल ही में NBFCs के लिए ब्रांच खोलने के नियमों में ढील देने के प्रस्तावों से इस सेक्टर को और बढ़ावा मिल सकता है।

Manappuram Finance का वैल्युएशन काफी महंगा लग रहा है, खासकर गिरते मुनाफे और मिश्रित ऑपरेशनल मेट्रिक्स को देखते हुए। AUM ग्रोथ अच्छी है, लेकिन प्रॉफिट में 15.9% की गिरावट, बढ़ते इम्पेयरमेंट चार्ज और गिरती यील्ड चिंता पैदा करते हैं। 60x से ऊपर का P/E रेशियो, Muthoot के 20-22x की तुलना में, बताता है कि शायद बाजार इसके ग्रोथ की उम्मीदों को ज्यादा आंक रहा है।

Muthoot Finance का मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस, अच्छी एसेट क्वालिटी और एनालिस्ट्स की सकारात्मक राय इसे एक बेहतर निवेश का विकल्प बनाती है। कंपनी ने FY26 के लिए अपने AUM ग्रोथ गाइडेंस को 30-35% तक बढ़ाया है और ग्रोथ को फंड करने के लिए $600 मिलियन जुटाए हैं। Manappuram Finance के सामने अपनी प्रॉफिटेबिलिटी सुधारने और अपने प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहराने की चुनौती है।

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