बजट 2026 का SGBs पर बड़ा असर
Union Budget 2026 में Sovereign Gold Bonds (SGBs) को लेकर टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। अब तक, जो निवेशक RBI से सीधे प्राइमरी इश्यू के तहत SGBs खरीदते थे और उन्हें मैच्योरिटी तक होल्ड करते थे, उन्हें मैच्योरिटी पर मिलने वाला लाभ टैक्स-फ्री होता था। लेकिन नए नियमों के तहत, यह टैक्स-फ्री लाभ केवल उन्हीं के लिए मान्य होगा जो सीधे RBI से बॉन्ड खरीदेंगे और मैच्योरिटी तक रखेंगे। सेकेंडरी मार्केट से SGBs खरीदने वाले निवेशकों को अब इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
सेकेंडरी मार्केट खरीदारों के लिए टैक्स का नया नियम
यानी, अगर आपने एक्सचेंजों से SGBs खरीदे हैं, तो अब मैच्योरिटी पर होने वाले मुनाफे पर आपको टैक्स देना होगा। अगर आप बॉन्ड को 12 महीने के अंदर बेचते हैं, तो इस पर आपके लागू इनकम स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगेगा। वहीं, अगर 12 महीने से ज्यादा समय तक रखने के बाद बेचते हैं, तो मुनाफे पर 12.5% का फ्लैट टैक्स लगेगा, जिसमें इंडेक्सेशन का फायदा भी नहीं मिलेगा। यह बदलाव उन निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका है जो सेकेंडरी मार्केट से SGBs खरीदकर टैक्स बचाने का फायदा उठा रहे थे।
आखिर क्यों हुआ ये बदलाव?
ICICI Prudential AMC के प्रिंसिपल – इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी, चिन्तन हारिया के मुताबिक, इस नीतिगत बदलाव का मकसद एक 'अनइंटेंडेड टैक्स आर्बिट्रेज' को खत्म करना है। माना जा रहा है कि सरकार को ऐसा लगा कि सेकेंडरी मार्केट में सस्ते में SGBs खरीदकर मैच्योरिटी पर टैक्स-फ्री लाभ उठाना स्कीम के असली मकसद से मेल नहीं खाता। इस बदलाव से निवेशकों को सीधे RBI से इश्यू होने वाले SGBs की ओर मोड़ने की कोशिश है, ताकि फिजिकल गोल्ड की मांग कम हो सके।
कीमतों में आई भारी गिरावट
बजट की घोषणा के तुरंत बाद, लिस्टेड SGB सीरीज की कीमतों में करीब 8% से 10% की भारी गिरावट देखी गई। इसकी तुलना में, MCX गोल्ड की कीमतों में लगभग 2.5% से 3% की मामूली गिरावट आई। हारिया का कहना है कि SGBs में यह बड़ी गिरावट मेटल की कीमतों में हलचल के कारण नहीं, बल्कि टैक्स के डर से आई है। उन्होंने यह भी बताया कि SGBs का मार्केट वॉल्यूम कम होता है, इसलिए जब निवेशक जल्दी से पोजीशन एग्जिट करने लगे, तो कीमतों में और भी ज्यादा गिरावट आई। उम्मीद है कि निवेशक अपने टैक्स का हिसाब-किताब पूरा कर लेंगे और ट्रेडिंग सामान्य हो जाएगी, जिसके बाद SGBs गोल्ड की कीमतों के साथ ज्यादा तालमेल बिठाएंगे।
अब गोल्ड में निवेश की नई रणनीति: SGBs बनाम ETFs?
सेकेंडरी मार्केट में टैक्स लाभ खत्म होने के बाद, निवेशकों को अब गोल्ड में निवेश के तरीकों पर फिर से विचार करना होगा। SGBs में अभी भी 2.5% सालाना ब्याज (जो टैक्सेबल है) मिलता है और कोई एक्सपेंस रेशियो नहीं लगता। लेकिन, इनकी लिक्विडिटी कम होने और बिड-आस्क स्प्रेड्स ज्यादा होने के कारण, खासकर मैच्योरिटी से पहले बेचने पर मिलने वाला रिटर्न कम हो सकता है।
इसके विपरीत, Gold Exchange Traded Funds (ETFs) और Gold Fund of Funds (FoFs) एक बेहतर विकल्प के तौर पर सामने आ रहे हैं। इन इंस्ट्रूमेंट्स में आमतौर पर ज्यादा लिक्विडिटी, टाइट स्प्रेड्स, 8 साल की लॉक-इन अवधि के बिना आसान एंट्री-एग्जिट, प्रोफेशनल गोल्ड वॉल्टिंग की सुविधा और छोटे, आसानी से खरीदे जा सकने वाले टिकट साइज मिलते हैं। FoFs में SIP का विकल्प भी है और डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं होती। हालांकि ETFs और FoFs में एक्सपेंस रेशियो लगता है, हारिया का सुझाव है कि कई निवेशकों के लिए लिक्विडिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और ऑपरेशनल सरलता जैसे फायदे इन लागतों से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं।