साल 2026 की पहली छमाही में ग्लोबल मर्जर और एक्विजिशन (M&A) मार्केट में जबरदस्त तेजी देखी गई है। कुल सौदों का वॉल्यूम **44%** बढ़कर **$3.16 ट्रिलियन** पर पहुंच गया है, जिसे मुख्य रूप से स्ट्रैटेजिक बायर्स ने आगे बढ़ाया है।
बाजार की मजबूती के पीछे की कहानी
भू-राजनीतिक तनाव और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं के बावजूद, साल 2026 का पहला हाफ डील-मेकिंग के लिहाज से बेहद शानदार रहा है। साल 2025 की समान अवधि की तुलना में इस बार सौदों में 44% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
स्ट्रैटेजिक बायर्स का दबदबा
JPMorgan की इन्वेस्टमेंट बैंकिंग ग्लोबल चेयर, अनु अयंगर के मुताबिक, इस ग्रोथ में फाइनेंशियल बायर्स के बजाय 'स्ट्रैटेजिक बायर्स' का दबदबा रहा है। कुल डील वॉल्यूम में इनका हिस्सा 78% है। ऐसी कंपनियां जिनके पास मजबूत कैश रिजर्व है, वे महंगे कर्ज के माहौल में भी विस्तार की योजनाओं को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।
AI स्पेंडिंग पर निवेशकों की कड़ी नजर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर हो रहा भारी-भरकम खर्च अब चर्चा का केंद्र है। डेटा सेंटर्स और चिप्स जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर $500 बिलियन से लेकर $1 ट्रिलियन तक का खर्च होने का अनुमान है। हालांकि निवेशक अभी तक शांत हैं, लेकिन 2027 तक उन्हें इन निवेशों से ठोस फाइनेंशियल रिटर्न की उम्मीद है। यदि कंपनियां अपने AI निवेश को प्रॉफिट में नहीं बदल पाईं, तो उन्हें निवेशकों की कड़ी नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।
आगे की चुनौतियां
डील-मेकिंग की रफ्तार के बीच कुछ जोखिम भी बरकरार हैं:
- Regulatory Scrutiny: दुनिया भर में एंटी-ट्रस्ट नियमों के तहत बड़े सौदों की जांच बढ़ गई है, जिससे सौदों में देरी या उन्हें रद्द करने का जोखिम बना हुआ है।
- Private Credit: निजी क्रेडिट सेक्टर में एक तरह का रेशनलाइजेशन (Rationalization) चल रहा है, जो बाजार में लिक्विडिटी को लेकर हो रहे सुधार का संकेत है।
निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण है कंपनियों का वह मैनेजमेंट कमेंट्री, जिसमें वे AI पर किए गए खर्च से होने वाले मुनाफे का रोडमैप पेश करेंगे।
