ग्लोबल कॉरपोरेट वेंचर फर्म्स का भारत पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है। डीपटेक और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में इस साल **$2.7 बिलियन** का निवेश हुआ है, लेकिन कंपनियां फिलहाल फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं।
भारत अब ग्लोबल दिग्गजों के लिए निवेश का नया केंद्र बनता जा रहा है। बड़ी कंपनियां सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एनर्जी ट्रांजिशन जैसे क्षेत्रों में दांव लगा रही हैं। हालांकि, यह निवेश किसी अचानक आई लहर की तरह नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है। औद्योगिक दिग्गज किसी भी बड़े कमिटमेंट से पहले स्टार्टअप्स की परफॉर्मेंस को बारीकी से परख रहे हैं।\n\n### Qualcomm और Hitachi जैसे दिग्गजों की एंट्री\n\nQualcomm और Hitachi Ventures जैसी कंपनियां पहले ही एक्टिव हैं। Qualcomm ने तो भारतीय स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने के लिए $150 मिलियन का फंड अलग से बनाया है। ये निवेश पारंपरिक वेंचर कैपिटल से अलग हैं क्योंकि ये कंपनियां सिर्फ पैसा नहीं देतीं, बल्कि अपने शुरुआती कमर्शियल क्लाइंट्स के रूप में स्टार्टअप्स की मदद भी करती हैं।\n\n### डीपटेक में बहार\n\nइस साल डीपटेक सेक्टर में भारी हलचल है। साल की शुरुआत से अब तक इस सेक्टर में $2.7 बिलियन का फंड आ चुका है, जो पिछले साल इसी अवधि के $1.7 बिलियन से काफी ज्यादा है। भारत में मौजूद बेहतरीन इंजीनियरिंग टैलेंट इसका सबसे बड़ा कारण है। अब ज्यादा युवा विदेश जाने के बजाय लोकल स्टार्टअप्स में काम करना पसंद कर रहे हैं।\n\n### भारत को लेकर क्या है रणनीति?\n\nखास बात यह है कि अभी भी कई ग्लोबल फर्म्स 'भारत-विशिष्ट' (India-specific) फंड बनाने से बच रही हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से ग्लोबल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, वे भारत को अपने ग्लोबल पोर्टफोलियो में ही शामिल कर रही हैं। कुछ कंपनियां तो भारत को अमेरिका के बाद दुनिया का अपना दूसरा सबसे पसंदीदा निवेश ठिकाना मान रही हैं।\n\n### निवेशकों के लिए जोखिम\n\nनिवेशकों को यह समझना होगा कि डीपटेक में रिस्क ज्यादा होता है। इन प्रोजेक्ट्स को कमर्शियल स्केल तक पहुंचने में लंबा वक्त लगता है और तकनीकी खराबी का डर हमेशा बना रहता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये स्टार्टअप्स अपने ऑपरेशंस को कितनी तेजी से बढ़ा पाते हैं और अपनी कॉर्पोरेट पार्टनरशिप्स को कितनी मजबूती से बनाए रखते हैं।
