मुंबई की फिनटेक कंपनी GetVantage ने इक्विटी और डेट मिलाकर **₹63 करोड़** की फंडिंग हासिल की है। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने कैपिटल गेटवे प्लेटफॉर्म को और बड़ा करने के लिए करेगी, जो छोटे बिजनेसेज को वर्किंग कैपिटल मुहैया कराता है।
मुंबई की फिनटेक कंपनी GetVantage ने सीरीज A1 फंडिंग राउंड में ₹63 करोड़ की भारी रकम जुटाई है। यह पैसा इक्विटी और डेट, दोनों के जरिए आया है। इस राउंड का नेतृत्व पूर्व RBL बैंक एमडी (MD) राजीव आहूजा और सैनराज ग्रुप ने किया। मौजूदा निवेशकों जैसे चिराते वेंचर्स (Chiratae Ventures), Varanium Fintech Fund, और VCMint ने भी इस फंडिंग में हिस्सा लिया, जो कंपनी पर उनके भरोसे को दिखाता है।
GetVantage का कैपिटल गेटवे (Capital Gateway) एक API-आधारित प्लेटफॉर्म है। यह छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को फाइनेंसिंग मुहैया कराने वाली कंपनियों से जोड़ता है। कंपनी इस नए फंड का इस्तेमाल प्लेटफॉर्म की पहुंच बढ़ाने और अपनी कुल फाइनेंसिंग क्षमता को ₹700 करोड़ से ऊपर ले जाने में करेगी। फिलहाल, यह प्लेटफॉर्म 2,000 से ज्यादा बिजनेसेज को रेवेन्यू-बेस्ड फाइनेंसिंग, टर्म लोन और मर्चेंट कैश एडवांस जैसे प्रोडक्ट ऑफर करता है।
आम बैंकों के विपरीत, जो फिजिकल कोलैटरल को प्राथमिकता देते हैं, GetVantage अल्टरनेटिव डेटा और प्रेडिक्टिव एनालिसिस पर आधारित अंडरराइटिंग मॉडल का उपयोग करता है। यह बिजनेस के कैश फ्लो और ऑपरेटिंग साइकल का मूल्यांकन करके वर्किंग कैपिटल तक तेज पहुंच सुनिश्चित करता है। कंपनी RBI-रजिस्टर्ड नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC), GetGrowth Capital के जरिए सीधे लेंडिंग प्रक्रिया में भी शामिल है।
चूंकि GetVantage एक प्राइवेट, अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए इसके शेयर NSE या BSE पर ट्रेड नहीं होते। यानी, आम निवेशक पब्लिक मार्केट में इसके शेयर नहीं खरीद सकते। फिनटेक लेंडिंग सेक्टर में दिलचस्पी रखने वालों के लिए इस बिजनेस मॉडल से जुड़े खास जोखिमों को समझना जरूरी है।
लेंडिंग इंडस्ट्री भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े रेगुलेटरी नियमों के तहत आती है। लेंडिंग नॉर्म्स या डिजिटल बैंकिंग रेगुलेशन में कोई भी बदलाव सीधे कंपनी के ऑपरेशन्स को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, कंपनी अल्टरनेटिव लेंडिंग के बेहद कॉम्पिटिटिव मार्केट में काम कर रही है। सफलता हेल्दी लोन बुक्स बनाए रखने और नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) को कंट्रोल में रखने पर निर्भर करती है, खासकर छोटे बिजनेसेज को उधार देते समय जो अस्थिर परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं।
ऐसे फिनटेक मॉडल्स के लिए एक और महत्वपूर्ण फैक्टर, डेट कैपिटल के लिए पार्टनर फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर निर्भरता है। अगर क्रेडिट मार्केट टाइट होते हैं या पार्टनर बैंक लेंडिंग में अपनी भागीदारी कम कर देते हैं, तो यह प्लेटफॉर्म की ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है। भविष्य में, कंपनी की लोन बुक का विस्तार करते हुए उच्च अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड बनाए रखने की क्षमता ही उसकी लंबी अवधि की स्थिरता का मुख्य पैमाना होगी।
