Gen Z का जलवा! भारत में पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वालों में इनकी हिस्सेदारी 50% पार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gen Z का जलवा! भारत में पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वालों में इनकी हिस्सेदारी 50% पार

भारत में पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वालों में Gen Z का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ये युवा अब आधी हिस्सेदारी रखते हैं, खासकर सेमी-अर्बन और ग्रामीण इलाकों में इनकी ग्रोथ जबरदस्त है। हालांकि, क्रेडिट कार्ड मार्केट अब पर्सनल लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन जैसे दूसरे विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है।

भारत में क्रेडिट कार्ड अपनाने में Gen Z सबसे आगे निकल आया है। मार्च 2026 तक, पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले कुल यूजर्स में इनकी हिस्सेदारी 50% हो गई है। ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यह इस बात का संकेत है कि युवा भारतीय अब औपचारिक क्रेडिट सिस्टम में एक नए तरीके से कदम रख रहे हैं। खास बात यह है कि इन नए कार्डधारकों में 46% सेमी-अर्बन और ग्रामीण इलाकों से हैं, जो चार साल पहले के 42% की तुलना में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी है।

बदलता क्रेडिट इस्तेमाल का पैटर्न

पिछले एक दशक में क्रेडिट कार्ड रखने वाले लोगों की कुल संख्या तो बढ़ी है, लेकिन कंज्यूमर क्रेडिट का स्वरूप बदल रहा है। रिपोर्ट बताती है कि क्रेडिट कार्ड की तुलना में पर्सनल लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे उधारदाताओं के लिए मुकाबला और कड़ा हो गया है। नतीजतन, कुल कंजम्पशन-आधारित क्रेडिट मार्केट में क्रेडिट कार्ड का हिस्सा कम हो गया है। मार्च 2026 में ऐसे खातों में क्रेडिट कार्ड का योगदान 38% रहा, जो मार्च 2016 में 56% था। इसी तरह, कुल कंजम्पशन-क्रेडिट में क्रेडिट कार्ड बैलेंस की हिस्सेदारी भी 36% से घटकर 26% रह गई है।

मार्केट के परिपक्व होने के बावजूद ग्रोथ

सापेक्ष हिस्सेदारी में गिरावट के बावजूद, क्रेडिट कार्ड सेगमेंट में निरपेक्ष (absolute) ग्रोथ काफी मजबूत बनी हुई है। क्रेडिट कार्ड पर कुल बकाया राशि 8.3 गुना बढ़कर ₹3.1 ट्रिलियन तक पहुंच गई है। प्रति कंज्यूमर औसत बकाया बैलेंस भी दोगुना से अधिक होकर ₹65,000 हो गया है। यह दर्शाता है कि भले ही प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, लेकिन व्यक्तिगत कार्डधारक अब क्रेडिट का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य के ट्रेंड्स

मार्च 2026 तक क्रेडिट-एक्टिव कंज्यूमर्स में केवल 25% लोगों के पास ही क्रेडिट कार्ड होने के बावजूद, भारत में आगे विस्तार की काफी गुंजाइश है। कंज्यूमर के व्यवहार में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि कई लोग अब अन्य उत्पादों के साथ इतिहास स्थापित करने के बाद ही क्रेडिट कार्ड मार्केट में प्रवेश करते हैं। लगभग 25% नए क्रेडिट कार्ड यूजर्स ने अपना पहला कार्ड अप्रूव होने से पहले ही तीन या अधिक एक्टिव क्रेडिट प्रोडक्ट्स ले रखे थे। यह ट्रेंड खास तौर पर Gen Z में देखा जा रहा है, जहां लगभग एक तिहाई के पास पहले से ही कई क्रेडिट खाते थे। ये युवा उपयोगकर्ता क्रेडिट का इस्तेमाल भी जल्दी शुरू कर रहे हैं, और कार्ड मिलने के तुरंत बाद ही वे बैलेंस जमा करना शुरू कर देते हैं।

निवेशक इस बात पर नजर रख सकते हैं कि कैसे पारंपरिक क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता तेजी से बढ़ते पर्सनल लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन सेगमेंट के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपनी रणनीतियों को समायोजित करते हैं। इंडस्ट्री के लिए मुख्य निगरानी योग्य (monitorable) बात इन बढ़ते बैलेंस की गुणवत्ता होगी, खासकर जब कई क्रेडिट खातों वाले युवा जनसांख्यिकी एक परिपक्व बाजार में अपने कुल लीवरेज को बढ़ा रहे हैं।

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