GSTAT की कोच्चि बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसके तहत एयरलाइंस अब कैंसिल टिकटों पर GST रिफंड पाने की हकदार होंगी। हालांकि, शर्त यह है कि कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उन्होंने पैसेंजर को टैक्स और किराया दोनों पूरी तरह वापस कर दिए हैं।
टैक्स अधिकारियों और एयरलाइंस के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद पर GSTAT ने अब स्थिति स्पष्ट कर दी है। सिंगापुर एयरलाइंस से जुड़े एक मामले में ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर एयरलाइंस यह पुख्ता सबूत दे दें कि टिकट कैंसिल होने पर पैसेंजर को पूरा पैसा (टैक्स समेत) लौटा दिया गया है, तो वे GST रिफंड क्लेम कर सकती हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले टैक्स विभाग ने 2019-2021 की अवधि के लिए ₹45.92 लाख के रिफंड दावे को खारिज कर दिया था।
एयरलाइंस के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला?
कानूनी विवाद इस बात पर था कि क्या टिकट कैंसिल होने पर टैक्स का पैसा 'एक्सेस पेमेंट' माना जाएगा। ट्रिब्यूनल ने माना है कि अगर कंपनी ने कोई टैक्स अपने पास नहीं रखा है, तो सरकार को उस पर टैक्स वसूलने का कोई हक नहीं है। यह एयरलाइंस की ऑपरेटिंग मार्जिन को बेहतर बनाने में मदद करेगा, क्योंकि अब उन्हें कैंसिल ट्रांजैक्शंस पर अनावश्यक टैक्स नहीं देना होगा।
कंप्लायंस का कड़ा इम्तिहान
हालांकि, यह फैसला एक बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आया है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि 'अनजस्ट एनरिचमेंट' (Unjust Enrichment) नहीं होना चाहिए—यानी कंपनी टैक्स का पैसा खुद नहीं रख सकती। एयरलाइंस को अब अपना पूरा ऑडिट ट्रेल तैयार रखना होगा, जिसमें इनवॉइस लिंक, क्रेडिट नोट्स और सेटलमेंट डेटा शामिल हो। विशेष रूप से थर्ड-पार्टी ट्रैवल एजेंट्स या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बुक किए गए टिकटों के लिए डॉक्यूमेंटेशन को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा, तभी कंपनियां इस टैक्स रिफंड का लाभ उठा पाएंगी।
