GST के 9 साल पूरे होने पर वित्तीय सेवा क्षेत्र में बड़े बदलाव आ रहे हैं। लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर टैक्स हटने से ये और किफायती होंगे। डिजिटल कंप्लायंस और GSTAT ट्रिब्यूनल से कामकाज में भी स्पष्टता आ रही है।
इंश्योरेंस की किफ़ायत पर असर
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के लागू होने के 9 साल बाद, भारतीय वित्तीय सेवा क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। हालिया एक सर्वे में 84% प्रतिभागियों ने 2026 के लिए सकारात्मक आउटलुक जताया है, जो GSTN पोर्टल के डिजिटल कंप्लायंस से बढ़ते भरोसे को दिखाता है।
सबसे बड़ा बदलाव GST दरों के युक्तिकरण में आया है, खासकर लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स से टैक्स हटा दिया गया है। पहले इन प्रीमियम पर 18% GST लगता था, जिससे पॉलिसीधारकों की लागत बढ़ जाती थी। इस टैक्स को हटाने से कवरेज की लागत कम होगी, जिससे देश भर में इंश्योरेंस की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। इंश्योरेंस कंपनियों के लिए, यह ज़्यादा ग्राहकों को आकर्षित करने का एक जरिया बन सकता है।
रेगुलेटरी और ऑपरेशनल बदलाव
ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस बना हुआ है, जहाँ 69% सर्वे उत्तरदाताओं ने डिजिटल कंप्लायंस को एक बड़ा फायदा बताया है। हालांकि, रेगुलेटरी माहौल और सख्त होता जा रहा है। ऑडिट के टैक्स डिमांड में बदलने की दर 2026 में बढ़कर 28% हो गई है, जो 2024 में 14% थी। इसका मतलब है कि कंपनियों को टैक्स विवादों से बचने के लिए रिकॉर्ड रखने में ज़्यादा सावधानी बरतनी होगी।
लंबे समय से चली आ रही कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) की स्थापना की गई है। यह विवादों के समाधान के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करेगा। इससे बड़े अदालतों पर बोझ कम होगा और मल्टी-स्टेट कॉर्पोरेट संस्थाओं के लिए ज़्यादा निश्चितता आएगी। इसके अलावा, सरकार ने साझा थर्ड-पार्टी इनवॉइस के लिए इनपुट सर्विस डिस्ट्रिब्यूटर (ISD) मैकेनिज्म को अनिवार्य कर दिया है, जो विभिन्न राज्यों में टैक्स क्रेडिट के प्रबंधन के लिए एक ज़्यादा मानकीकृत तरीका अपनाता है।
भविष्य की उम्मीदें और अगले कदम
आगे देखते हुए, यह क्षेत्र 'GST 2.0' रोडमैप पर काम कर रहा है जो डेटा-संचालित निर्णय लेने पर जोर देता है। लगभग 89% उद्योग प्रतिभागियों ने मैन्युअल गलतियों को कम करने के लिए डेटा प्रोसेसिंग और रिकंसिलिएशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग की वकालत की है। इसके अलावा, ऐसे सुधारों की मज़बूत मांग है जो कंपनियों को वर्किंग कैपिटल अनलॉक करने की सुविधा दें, जैसे कि अनयूटिलाइज्ड इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड की सुविधा देना और सेंट्रल टैक्स क्रेडिट के ट्रांसफर को सक्षम करना। निवेशकों के लिए, इस विकास का अगला चरण इस बात से तय होगा कि कंपनियां इन नए डिजिटल कंप्लायंस मानकों को कितनी प्रभावी ढंग से अपनाती हैं और क्या इंश्योरेंस टैक्स हटाने से इंश्योरेंस इंडस्ट्री में प्रीमियम वॉल्यूम में लगातार बढ़ोतरी होती है।
