GST Council ने व्यवसायों को अपने कर्मचारियों के लिए लिए गए ग्रुप हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर Input Tax Credit (ITC) का दावा करने की सिफारिश की है। वर्तमान में इस पर **18%** का नॉन-रिकवरेबल टैक्स लगता है, जिसे हटाने से कंपनियों का खर्च कम होगा। ध्यान रहे, यह फिलहाल एक सिफारिश है और आधिकारिक नोटिफिकेशन के बाद ही प्रभावी होगी।
8 अक्टूबर 2026 को हुई 57वीं GST काउंसिल की बैठक में एक बड़ा प्रस्ताव रखा गया है। काउंसिल ने Central Goods and Services Tax (CGST) Act, 2017 की Section 17(5) में संशोधन करने की सिफारिश की है, ताकि नियोक्ता (employers) अपने कर्मचारियों को दी जाने वाली ग्रुप हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर भरे गए GST का Input Tax Credit क्लेम कर सकें।\n\n### बिजनेस लागत पर क्या होगा असर?\n\nफिलहाल, जो कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस लेती हैं, उन्हें 18% GST चुकाना पड़ता है। यह टैक्स अभी एक ऐसा खर्च है जिसकी भरपाई नहीं हो पाती, जिससे कंपनी का कुल खर्च बढ़ जाता है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कंपनियां इस 18% टैक्स को अपनी आउटपुट टैक्स लायबिलिटी के खिलाफ एडजस्ट कर सकेंगी। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई कंपनी ₹10 लाख का प्रीमियम भरती है, तो उस पर लगने वाला ₹1.8 लाख का GST अब बर्बाद नहीं होगा, बल्कि उसे क्रेडिट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।\n\nयह बदलाव विशेष रूप से MSMEs के लिए राहत भरा हो सकता है, क्योंकि वे अक्सर लागत कम करने के दबाव में रहते हैं।\n\n### निवेशकों और मालिकों के लिए जरूरी जानकारी\n\nनिवेशकों को यह समझना चाहिए कि अभी यह सिर्फ एक सिफारिश है। जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक नोटिफिकेशन या कानूनी संशोधन नहीं आता, तब तक कोई भी कंपनी इस क्रेडिट का दावा नहीं कर सकती। जल्दबाजी में इसे क्लेम करना टैक्स विवाद और कानूनी मुश्किलों को न्योता दे सकता है। भविष्य में जब यह नियम लागू होगा, तब कंपनियों को अपनी अकाउंटिंग और इनवॉइसिंग को पूरी तरह से नियमों के अनुसार ढालना होगा ताकि क्रेडिट क्लेम करने में कोई तकनीकी दिक्कत न आए।
