GST Council Meeting: डिजिटल पेमेंट पर लगने वाले 18% GST टैक्स की समीक्षा संभव, छोटे व्यापारियों को मिल सकती है राहत

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AuthorNeha Patil|Published at:
GST Council Meeting: डिजिटल पेमेंट पर लगने वाले 18% GST टैक्स की समीक्षा संभव, छोटे व्यापारियों को मिल सकती है राहत

सरकार ने साफ कर दिया है कि केवल GST-रजिस्टर्ड मर्चेंट्स ही डिजिटल पेमेंट फीस पर टैक्स क्रेडिट क्लेम कर सकते हैं। इसके चलते बिना रजिस्ट्रेशन वाले छोटे व्यापारियों पर **18%** का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है, जिसे लेकर **7 अक्टूबर** को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में बड़ी राहत की उम्मीद है।

सरकार ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स (MDR) पर लगने वाले 18% GST को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। MDR वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल या कार्ड पेमेंट स्वीकार करने के लिए बैंकों या पेमेंट एग्रीगेटर्स को देते हैं। अभी तक की व्यवस्था के मुताबिक, GST-रजिस्टर्ड बड़ी और मध्यम कंपनियों के लिए यह टैक्स बहुत बड़ी चिंता नहीं है, क्योंकि वे इस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा कर सकती हैं, जिससे यह उनकी बैलेंस शीट पर अतिरिक्त खर्च के रूप में नहीं दिखता।

छोटे व्यापारियों के सामने चुनौती

समस्या तब खड़ी होती है जब बात छोटे या बिना रजिस्ट्रेशन वाले व्यापारियों की आती है। जो कारोबारी GST के दायरे में नहीं हैं या 'कंपोजिशन स्कीम' का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके पास इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने की सुविधा नहीं है। नतीजतन, पेमेंट प्रोसेसिंग पर लगने वाला 18% का GST उनके लिए पूरी तरह से एक अतिरिक्त और वसूल न होने वाला खर्च बन जाता है। इससे बाजार में एक बड़ी असमानता पैदा हो रही है, जहां छोटे वेंडर्स बड़े प्रतिस्पर्धियों की तुलना में डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर ज्यादा आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं।

क्या है पेच?

डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम, जिसमें बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर्स शामिल हैं, काफी जटिल है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल इनपुट क्रेडिट मिलना ही काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए सही इनवॉइसिंग और बैंक व व्यापारी के बीच पूरी रिकॉन्सिलिएशन (reconciliation) का होना जरूरी है। रिपोर्टिंग में छोटी सी चूक भी क्रेडिट मिलने में देरी या उसकी नामंजूरी का कारण बन सकती है, जिससे छोटे व्यापारियों का ऑपरेशनल बोझ और बढ़ जाता है।

7 अक्टूबर की बैठक पर नजर

अब सभी की निगाहें 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक पर टिकी हैं। हालांकि सरकार ने अभी तक इस मुद्दे को औपचारिक रूप से एजेंडा में शामिल करने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि छोटे व्यापारियों को डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सरकार नीतिगत बदलाव कर सकती है। यदि काउंसिल इस दिशा में राहत देती है, तो यह छोटे कारोबारियों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की राह और आसान बना देगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.