GST काउंसिल की 57वीं बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए अनुपालन (Compliance) का बोझ कम किया गया है। टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियों को सीमित करने के साथ ही, अब कंपनियों को इंश्योरेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फायदा मिलेगा।
गिरफ्तारी और कानूनी शिकंजा कम
GST काउंसिल ने सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट के सेक्शन 69 के तहत टैक्स अधिकारियों को मिली गिरफ्तारी की शक्तियों पर लगाम लगा दी है। अब अधिकारियों को गिरफ्तारी के लिए न्यायिक अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा, क्रिमिनल प्रोसेक्यूशन शुरू करने की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है। साथ ही, अब ₹10,000 से कम के टैक्स विवादों के लिए शो-कॉज नोटिस जारी नहीं किए जाएंगे, जिससे कंपनियों का कीमती समय बचेगा।
कॉर्पोरेट मार्जिन को मिलेगा बूस्ट
काउंसिल ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दायरा बढ़ाकर कंपनियों को बड़ी राहत दी है। अब कंपनियां कर्मचारियों के स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम, टेलीकॉम टावर, पाइपलाइन और आउटडोर कैटरिंग जैसी सुविधाओं पर टैक्स डिडक्शन का दावा कर सकेंगी। इससे आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे सेक्टर के मुनाफे पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
गिग-इकोनॉमी और डिलीवरी सर्विस
ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए भी बड़ी खबर है। अब अनरजिस्टर्ड पार्टनर्स द्वारा दी जाने वाली डिलीवरी सर्विसेज पर GST की दर को 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों को कम किया जा सकेगा।
आगे क्या होगा?
इन सुधारों की घोषणा हो चुकी है, लेकिन इन्हें कानूनी रूप से लागू होने के लिए सरकार की ओर से आधिकारिक नोटिफिकेशन और वैधानिक संशोधनों (Statutory Amendments) का इंतजार है। बिजनेस के लिए अब इन बदलावों की प्रभावी तारीख (Effective Date) देखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
