57वीं GST Council ने फार्मा कंपनियों को बड़ी राहत दी है। अब कंपनियां फ्री फिजिशियन सैम्पल्स और एक्सपायर्ड इन्वेंट्री पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा कर सकेंगी, जिससे कैश फ्लो बेहतर होगा।
फार्मा सेक्टर के लिए 8 अक्टूबर, 2026 को हुई 57वीं GST Council की बैठक एक गेम-चेंजर साबित हुई है। काउंसिल ने टैक्स नियमों में बदलाव की सिफारिश की है, जिससे अब कंपनियां फ्री फिजिशियन सैम्पल्स और एक्सपायर्ड गुड्स पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ले सकेंगी। यह फैसला इंडस्ट्री की बरसों पुरानी मांग को पूरा करता है।
टैक्स का बोझ होगा कम
अब तक CGST एक्ट की धारा 17(5) के तहत इन आइटम्स पर ITC की अनुमति नहीं थी, जिससे फार्मा कंपनियों पर टैक्स का बोझ बढ़ जाता था। अब ITC मिलने से 'टैक्स कास्केडिंग' की समस्या कम होगी और बिजनेस करने की लागत में कमी आएगी।
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर पर बड़ी राहत
सिर्फ सैम्पल्स ही नहीं, बल्कि सरकार ने 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' (जहां कच्चे माल पर टैक्स फिनिश्ड गुड्स से ज्यादा होता है) से जूझ रही कंपनियों के लिए भी रास्ता साफ किया है। 1 नवंबर, 2026 से रिफंड कैलकुलेशन में इनपुट सर्विसेज को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, 1 अप्रैल, 2027 से प्लांट और मशीनरी पर भी क्रेडिट की सुविधा दी जाएगी, जो वैक्सीन और बायोलॉजिक्स बनाने वाली कंपनियों के लिए बड़ी राहत है।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
निवेशकों के नजरिए से यह सेक्टर में लिक्विडिटी सुधारने का संकेत है। हालांकि, इन फायदों को पाने के लिए कंपनियों को सख्त अनुपालन (Compliance) का पालन करना होगा। एक्सपायर्ड दवाओं को नष्ट करने के प्रमाण और सही डॉक्यूमेंटेशन ही ऑडिट के दौरान काम आएंगे। बाजार अब इन नियमों के औपचारिक नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहा है, जो टैक्स बचत के असल गणित को स्पष्ट करेंगे।
