देश की चार सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को अब अपना 'Turnaround Plan' पेश करना होगा। इन कंपनियों ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में कुल **₹10,000 करोड़** से ज्यादा का नुकसान दर्ज किया है और ये कंपनियां रेगुलेटरी सॉल्वेंसी नॉर्म्स को पूरा करने में भी पिछड़ रही हैं।
भारत सरकार ने देश की चार सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों—New India Assurance, Oriental Insurance, United India Insurance, और National Insurance को कड़ा निर्देश जारी किया है। इन कंपनियों को अब एक विस्तृत और बोर्ड-अप्रूव्ड 'टर्नअराउंड प्लान' (Turnaround Plan) सौंपना होगा। यह कदम यह दर्शाता है कि अब ये कंपनियां सरकारी पूंजी पर निर्भर रहने के बजाय खुद को फाइनेंशियली मजबूत बनाने (Self-sufficiency) की दिशा में काम करेंगी।
बढ़ते घाटे का दबाव
यह फैसला कंपनियों की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए लिया गया है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, इन कंपनियों का सामूहिक नेट लॉस ₹10,000 करोड़ के पार पहुंच गया था। कभी सेक्टर का बेंचमार्क मानी जाने वाली New India Assurance ने भी चौंकाते हुए फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में ₹1,267 करोड़ का घाटा दर्ज किया। बाकी तीन कंपनियों की हालत तो और भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
IRDAI के मानकों पर संकट
ये कंपनियां Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) द्वारा अनिवार्य 'सॉल्वेंसी रेश्यो' (Solvency Ratio) को पूरा करने में लगातार नाकाम रही हैं। रेगुलेटर के मुताबिक, कंपनियों को 1.5 का सॉल्वेंसी रेश्यो बनाए रखना होता है, जो पॉलिसीहोल्डर्स के दावों को चुकाने के लिए एक सुरक्षा कवच है। इस रेश्यो के नीचे गिरने से न केवल वित्तीय स्थिरता को खतरा है, बल्कि कंपनियों का बिजनेस विस्तार भी सीमित हो गया है।
नई रणनीति: टेक्नोलॉजी और अनुशासन
सरकार ने अब घाटे के चक्र को रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। कंपनियों को उन बिजनेस लाइन्स को रोकने के लिए कहा गया है जो घाटे में चल रही हैं, जैसे कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं। अब फोकस 'ऑर्गेनिक ग्रोथ' पर होगा। इसके अलावा, धोखाधड़ी (Fraud) रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंस्पेक्शन टूल्स का सहारा लिया जाएगा ताकि दावों के निपटारे में होने वाली गड़बड़ियों को कम किया जा सके। भविष्य में सरकारी मदद अब केवल बेहतर परफॉर्मेंस और ऑपरेशनल सुधारों पर ही निर्भर करेगी।
