GIFT-IFSC में बनी ट्रेजरी यूनिट्स में निवेश का आंकड़ा जून 2026 तक दोगुना होकर **$496 मिलियन** पहुंच गया है। अप्रैल 2025 में हुए रेगुलेटरी बदलावों के बाद देश की बड़ी कंपनियां अपनी लिक्विडिटी और फॉरेक्स मैनेजमेंट को अब यहीं से कंट्रोल कर रही हैं।
भारतीय कॉर्पोरेट जगत अब अपने ग्लोबल फाइनेंस ऑपरेशंस को मैनेज करने के लिए GIFT-IFSC को अपना मुख्य गढ़ बना रहा है। मार्च 2026 में जो निवेश $235 मिलियन था, वह जून 2026 तक उछलकर $496 मिलियन हो गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि कैसे भारतीय दिग्गज अब अपनी फॉरेक्स जरूरतों और लिक्विडिटी को विदेशी ठिकानों के बजाय घरेलू हब से ही हैंडल कर रहे हैं।
कौन सी कंपनियां हैं रेस में?
Zydus Lifesciences, Bharti Airtel, Sun Pharma और Indus Towers जैसी बड़ी कंपनियों ने पहले ही यहां अपनी ट्रेजरी यूनिट्स स्थापित कर ली हैं। इस मॉडल से कंपनियों को ग्रुप-लेवल की बोरिंग, क्रॉस-बॉर्डर फंडिंग और जटिल फाइनेंशियल हेजिंग को एक ही जगह से कंट्रोल करने में मदद मिल रही है।
क्यों बदल रही है रणनीति?
अप्रैल 2025 में International Financial Services Centres Authority (IFSCA) द्वारा जारी अपडेट ने ट्रेजरी सेंटर्स को काफी छूट दी है। अब ये कंपनियां कॉम्प्लेक्स डेरिवेटिव ट्रांजैक्शंस आसानी से कर पा रही हैं। साथ ही, 20 साल का टैक्स हॉलिडे और ब्याज भुगतान पर 'विथहोल्डिंग टैक्स' से राहत ने इसे दुबई और सिंगापुर जैसे पुराने सेंटर्स से कहीं ज्यादा आकर्षक बना दिया है।
बड़ा वॉल्यूम और भविष्य के संकेत
जून 2026 तक, इन सेंटर्स के जरिए करीब $6.54 बिलियन के लोन और एडवांस मैनेज किए जा रहे हैं। हालांकि, यह मॉडल एफिशिएंसी तो बढ़ा रहा है, लेकिन निवेशकों को ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स और करेंसी वोलैटिलिटी जैसे रिस्क पर भी नजर रखनी होगी। आने वाले समय में अगर कमोडिटी ट्रेडिंग को भी यहां वित्तीय सेवा के तौर पर मंजूरी मिलती है, तो ट्रांजैक्शन का यह वॉल्यूम और भी तेजी से बढ़ सकता है।
