GIFT City: निवेशकों का नया ठिकाना! ₹70 अरब से ज्यादा का निवेश, ग्लोबल रैंकिंग में बड़ी छलांग

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AuthorNeha Patil|Published at:
GIFT City: निवेशकों का नया ठिकाना! ₹70 अरब से ज्यादा का निवेश, ग्लोबल रैंकिंग में बड़ी छलांग
Overview

गुजरात का GIFT City तेज़ी से एक अहम ग्लोबल फाइनेंशियल हब के तौर पर उभर रहा है। 2020 से अब तक यह **$70 अरब** से ज़्यादा का निवेश आकर्षित कर चुका है, मुख्य रूप से एक्सटर्नल कमर्शियल बोरिंग्स (ECBs) और ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के ज़रिए। इसकी ग्लोबल रैंकिंग में भी ज़बरदस्त सुधार आया है, और यह विमान लीजिंग व रीइंश्योरेंस जैसे नए बिज़नेस सेगमेंट में भी सक्रिय हो रहा है।

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निवेश का बढ़ता सैलाब

साल 2020 के बाद से, GIFT City ने $70 अरब से अधिक की पूंजी को आकर्षित किया है। इसमें से $56 अरब एक्सटर्नल कमर्शियल बोरिंग्स (ECBs) से आए हैं, जबकि बाकी ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) में लगे हैं। यह भारत की बढ़ती वित्तीय अपील को दर्शाता है। वहीं, भारत में AIFs का असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) सितंबर 2023 तक ₹9.54 लाख करोड़ तक पहुंच गया था, जो निवेशकों की बढ़ती समझ और विविध निवेश विकल्पों की मांग को दिखाता है।

ग्लोबल मंच पर बड़ी छलांग

GIFT City की वैश्विक पहचान लगातार बढ़ी है। यह 2021 में 92वें स्थान से चढ़कर अक्टूबर 2025 तक ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर्स इंडेक्स (GFCI) में 43वें स्थान पर पहुंच गया है। फिनटेक रैंकिंग में 35वें स्थान पर आना, भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) फ्रेमवर्क में बढ़ते भरोसे को दिखाता है। इसका लक्ष्य सिंगापुर और दुबई जैसे स्थापित हब को टक्कर देना है।

नए सेगमेंट दे रहे गति

विमान लीजिंग (Aircraft Leasing) और रीइंश्योरेंस (Reinsurance) जैसे नए बिज़नेस सेगमेंट GIFT City के विकास को गति दे रहे हैं। भारत का विमान लीजिंग बाज़ार अगले कुछ सालों में 16.6% से ज़्यादा की CAGR से बढ़ने की उम्मीद है। इसी तरह, भारतीय रीइंश्योरेंस बाज़ार 2034 तक $43.5 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, और GIFT City वैश्विक रीइंश्योरर्स के लिए एक आकर्षक केंद्र बन गया है।

चुनौतियां भी कम नहीं

अपनी तेज़ तरक्की के बावजूद, GIFT City को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सिंगापुर और दुबई जैसे स्थापित वित्तीय केंद्रों से मुकाबला ज़बरदस्त है। सबसे बड़ी मुश्किल अनुभवी पेशेवरों को आकर्षित करने में आ रही है, जहाँ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में 30-40% तक की एट्रिशन रेट देखी गई है। इसके अलावा, जीवनशैली से जुड़ी सुविधाओं की कमी, आवास की समस्या (डेवलपमेंट एरिया का केवल 22% आवासीय है) और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे भी इसके विकास में बाधा डाल रहे हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.