GIFT City में ट्रेडिंग का तूफ़ान! Q1 FY27 में $1.93 अरब का आंकड़ा पार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
GIFT City में ट्रेडिंग का तूफ़ान! Q1 FY27 में $1.93 अरब का आंकड़ा पार

GIFT City के ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म्स (GAPs) पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में ज़बरदस्त उछाल आया है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में यह **$1.93 बिलियन** तक पहुँच गया, जो पिछले क्वार्टर के मुकाबले लगभग दोगुना है। अमेरिकी स्टॉक्स में बढ़ती रिटेल और इंस्टीट्यूशनल रुचि इस ग्रोथ की मुख्य वजह है।

कैसे बढ़ा GIFT City में ऑफशोर ट्रेडिंग?

GIFT City में ऑफशोर ट्रेडिंग एक्टिविटी में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म्स (GAPs) के ज़रिए ट्रेड हुए सिक्योरिटीज का वैल्यू $1.93 बिलियन रहा। यह पिछले क्वार्टर के $963.62 मिलियन और फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही के $639.44 मिलियन से कहीं ज़्यादा है। यह दिखाता है कि भारतीय निवेशक अब ग्लोबल मार्केट्स में डाइवर्सिफाई करने को ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।

अमेरिकी स्टॉक्स का जलवा

इस ट्रेडिंग फ्लो का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिकी एक्सचेंजों से आया है, जिसने कुल वॉल्यूम का करीब $1.5 बिलियन का योगदान दिया। निवेशकों की दिलचस्पी दूसरे अंतरराष्ट्रीय मार्केट्स में भी फैल रही है। साउथ कोरियाई और जर्मन एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग वैल्यू क्रमशः $272 मिलियन और $43.7 मिलियन दर्ज की गई। यह ट्रेंड साफ दिखाता है कि रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशक, इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) फ्रेमवर्क के ज़रिए ग्लोबल इक्विटीज और ईटीएफ (ETFs) में एक्सपोज़र बढ़ा रहे हैं।

रिटेल पार्टिसिपेशन में भारी इज़ाफ़ा

वॉल्यूम में इस बढ़ोतरी के साथ ही यूजर बेस में भी तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या बढ़कर 66,210 हो गई, जो पिछले क्वार्टर के 4,940 क्लाइंट्स के मुकाबले बहुत ज़्यादा है। यह ग्रोथ पिछले साल इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) द्वारा बनाए गए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के बाद आई है, जिसने कई फाइनेंशियल फर्मों को ब्रोकरेज सेवाएं शुरू करने का रास्ता दिखाया। जून में ही 16 ब्रोकर्स ने इन ट्रांजैक्शन्स को सुविधाजनक बनाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

निवेश पर असर डालने वाले फ़ैक्टर्स

Zerodha और Upstox जैसी कई बड़ी भारतीय ब्रोकरेज फर्मों ने इस मांग को भुनाने के लिए GIFT City में रजिस्ट्रेशन करा लिया है। Groww जैसे अन्य प्लेयर्स भी ज़रूरी लाइसेंस मिलने के बाद यू.एस. स्टॉक ट्रेडिंग सेवाएं शुरू करने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि एक्सेस में आसानी बढ़ रही है, लेकिन निवेशकों को अभी भी कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जो नेट इन्वेस्टमेंट कॉस्ट को प्रभावित करती हैं। खास तौर पर, ₹10 लाख से ज़्यादा के रेमिटेंस पर 20% टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) एक अहम चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि यह टैक्स फाइनल लायबिलिटी के मुकाबले एडजस्ट किया जा सकता है, लेकिन यह इन्वेस्टमेंट के लिए उपलब्ध फंड की तत्काल उपलब्धता को प्रभावित करता है। इसके अलावा, निवेशक इन टैक्स इंप्लिकेशन्स के साथ-साथ फॉरेन एक्सचेंज चार्जेस और प्लेटफॉर्म विड्रॉल फीस जैसे अतिरिक्त खर्चों को भी संतुलित कर रहे हैं, जो ग्लोबल मार्केट्स में ट्रेडिंग की फाइनल कॉस्ट को सीधे प्रभावित करते हैं।

भविष्य में, निवेशकों के लिए मुख्य बातों में नए ब्रोकर्स के ऑनबोर्डिंग की रफ़्तार, टैक्स कलेक्शन नॉर्म्स में कोई संभावित बदलाव और GIFT City इकोसिस्टम में और सर्विस प्रोवाइडर्स के आने के साथ ट्रांजैक्शन कॉस्ट की ओवरऑल कॉम्पिटिटिवनेस शामिल होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.