GIFT City अब अपने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में बड़े बदलाव कर रहा है। नई डायरेक्ट-लिस्टिंग पॉलिसी और आसान KYC प्रोसेस के जरिए विदेशी निवेश को आकर्षित करने की तैयारी है, हालांकि मार्केट में लिक्विडिटी को लेकर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
GIFT City के रेगुलेटर्स अब विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में एंट्री को और आसान बना रहे हैं। इस पूरे बदलाव का मुख्य मकसद इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) को ग्लोबल कैपिटल फ्लो के लिए एक मजबूत पुल की तरह तैयार करना है।
डायरेक्ट-लिस्टिंग और KYC में बदलाव
इस नई पहल के तहत 'डायरेक्ट-लिस्टिंग फ्रेमवर्क' सबसे महत्वपूर्ण है। इसके आने के बाद कंपनियां बिना ट्रेडिशनल IPO के भी GIFT City के एक्सचेंज पर अपने शेयर लिस्ट कर सकेंगी। इसके अलावा, International Financial Services Centres Authority (IFSCA) ने SEBI के साथ मिलकर KYC प्रोसेस को डिजिटल और स्मूथ बनाया है। साल 2026 के अंत तक, रेगुलेटेड एंटिटीज SEBI की KRA (KYC Registration Agency) सिस्टम को एक्सेस कर सकेंगी, जिससे कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
बॉन्ड मार्केट की सफलता और इक्विटी के चुनौतियां
हालांकि इक्विटी मार्केट अभी अपने शुरुआती दौर में है, लेकिन डेट मार्केट (Debt Market) में GIFT City ने पहले ही झंडे गाड़ दिए हैं। अब तक यहां से करीब $85 बिलियन जुटाए जा चुके हैं। HDFC, ICICI और Kotak Mahindra जैसे बड़े बैंक पहले ही यहां से इंटरनेशनल बॉन्ड जारी कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
बावजूद इसके, चुनौतियां कम नहीं हैं। पहला बड़ा सवाल इक्विटी मार्केट में लिक्विडिटी (Liquidity) का है कि क्या यह नए फ्रेमवर्क से पर्याप्त वॉल्यूम जुटा पाएगा। साथ ही, 30 अक्टूबर 2026 की डेडलाइन तक डेटा इंटीग्रेशन की सफलता पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा। फिलहाल ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता और जियो-पॉलिटिकल तनाव को देखते हुए, निवेशकों को अभी सतर्क रहकर अगले चरणों का इंतजार करना चाहिए।
