GIFT City में विदेशी निवेश रुका: क्यों फंड मैनेजर्स उठा रहे हैं सवाल?

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
GIFT City में विदेशी निवेश रुका: क्यों फंड मैनेजर्स उठा रहे हैं सवाल?
Overview

GIFT City में फंड मैनेजर्स की मांग है कि NRI और विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए ओमनिबस स्ट्रक्चर (omnibus structures) और डिजिटल KYC (digital KYC) जैसी सुविधाएं दी जाएं। हालांकि, प्रगति के बावजूद, ऑपरेशनल बाधाएं और अनुपालन का बोझ इसे बड़े ग्लोबल फाइनेंशियल हब के मुकाबले कमजोर बना रहे हैं।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

स्ट्रक्चरल बाधाएं बन रहीं रोड़ा

GIFT City को भले ही इंटरनेशनल फाइनेंस के लिए भारत का सबसे बड़ा गेटवे बताया जा रहा हो, लेकिन असलियत यह है कि संस्थागत फंड मैनेजर्स को यहां पुराने और जटिल नियमों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी रुकावट ओमनिबस इन्वेस्टमेंट स्ट्रक्चर (omnibus investment structures) का न होना है, जो सिंगापुर और दुबई जैसे ग्लोबल हब में आम बात है।

इसके बिना, वेल्थ मैनेजर्स और इंश्योरेंस कंपनियों को हर क्लाइंट के लिए अलग से ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। यह एक बड़ी बाधा है जो प्लेटफॉर्म को बड़े पैमाने पर पूंजी प्रवाह से दूर रख रही है, जो इंटरनेशनल प्राइवेट बैंकिंग की पहचान है। बड़ी एसेट मैनेजमेंट फर्मों के एग्जीक्यूटिव्स का कहना है कि अगर एग्रीगेटेड अकाउंट मॉडल (aggregated account models) की तरफ बदलाव नहीं हुआ, तो यह हब एक छोटे रीजनल हब से आगे नहीं बढ़ पाएगा।

कॉम्पिटिशन में पिछड़ रहा GIFT City?

जब GIFT City की तुलना स्थापित फाइनेंशियल सेंटर्स से की जाती है, तो बिजनेस करने में आसानी के मामले में बड़ा अंतर साफ नजर आता है। भारत के इक्विटी मार्केट इंडेक्स भले ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर हों, लेकिन बड़े विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स को आकर्षित करने के लिए सिर्फ परफॉरमेंस ही काफी नहीं है; ग्लोबल कस्टोडियन नेटवर्क्स के साथ सीमलेस इंटीग्रेशन (seamless integration) भी जरूरी है।

मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, जिसमें हर व्यक्ति के लिए टैक्स रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, समय और दक्षता पर एक तरह का टैक्स लगाता है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि एनआरआई (NRI) आबादी बड़ी लिक्विडिटी का एक बड़ा सोर्स हो सकती है, लेकिन एडमिनिस्ट्रेटिव ओवरहेड (administrative overhead) एक बड़ी रुकावट है। इस वजह से ये निवेशक GIFT City प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने के बजाय पारंपरिक और कम प्रभावी तरीकों का सहारा ले रहे हैं।

फॉरेंसिक रिस्क और टैलेंट की कमी

ऑपरेशनल स्तर पर, इस हब को एक और समस्या का सामना करना पड़ रहा है: टैलेंट की अस्थिरता। फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट के भीतर टैलेंट का लगातार आना-जाना (Talent churn) इतना ज्यादा है कि यह वहां काम कर रही फर्मों की लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी के लिए खतरा बन गया है।

जब स्पेशलिस्ट स्टाफ बार-बार भूमिकाएं बदलते हैं, तो संस्थागत ज्ञान (institutional memory) खत्म हो जाता है, और बार-बार ट्रेनिंग की जरूरत के कारण रेगुलेटरी कंप्लायंस की लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, यह भी एक बड़ा जोखिम है कि सरलीकृत KYC के जरिए एंट्री बैरियर को जल्दबाजी में कम करने से रेगुलेटर्स अनजाने में ऐसे लूपहोल बना सकते हैं जो कैपिटल कंट्रोल्स (capital controls) को लेकर जांच को आमंत्रित कर सकते हैं।

नीति निर्माताओं को एक नाजुक संतुलन बनाना होगा; उन्हें फंड मैनेजर्स को खुश करने के लिए एंट्री बैरियर को कम करना होगा, साथ ही ग्लोबल AML स्टैंडर्ड्स (AML standards) को पूरा करने के लिए कड़े ओवरसाइट को भी बनाए रखना होगा।

आगे की रणनीति

इंडस्ट्री का मानना है कि रेगुलेटरी फिलॉसफी में एक अनिवार्य बदलाव की जरूरत है। उम्मीद है कि अथॉरिटीज पर डिजिटल-फर्स्ट आइडेंटिटी वेरिफिकेशन (digital-first identity verification) और, इससे भी महत्वपूर्ण, एक आधुनिक कंप्लायंस रेजीम (compliance regime) लाने का दबाव बढ़ेगा जो कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट पूल्स (collective investment pools) को एक इकाई के रूप में माने। निवेशकों के लिए, GIFT City की लॉन्ग-टर्म वायबिलिटी (long-term viability) मार्केटिंग अभियानों पर नहीं, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि क्या विधायी वातावरण (legislative environment) ग्लोबल मार्केट ऑपरेशंस की गति से मेल खाने के लिए विकसित हो सकता है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.