GIFT City अब सिर्फ कॉर्पोरेट हब नहीं रहा। **$52.82 बिलियन** के भारी FCNR(B) डिपॉजिट और फंड मैनेजमेंट में **52%** रिटेल भागीदारी के साथ, यह अब आम निवेशकों के लिए एक बड़ा फाइनेंशियल सेंटर बनने की राह पर है।
GIFT City ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब यह केवल कॉर्पोरेट बैंकिंग तक सीमित न रहकर रिटेल फाइनेंशियल मार्केट पर कब्जा करने की तैयारी कर रहा है। यह बदलाव एक मजबूत लिक्विडिटी के साथ आया है, जहां 31 अगस्त 2026 तक IFSC बैंकिंग यूनिट्स ने RBI की विशेष स्वैप सुविधा के तहत $52.82 बिलियन का डिस्बर्समेंट किया है।
फंड मैनेजमेंट में उछाल
यह बदलाव फंड मैनेजमेंट सेक्टर में साफ दिख रहा है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में, GIFT IFSC फंड्स में कुल निवेशकों में से 52% से ज्यादा रिटेल निवेशक थे, जिनकी संख्या बढ़कर 8,467 तक पहुंच गई है। IFSCA अब उन तकनीकी बाधाओं को दूर कर रहा है जो पहले व्यक्तिगत निवेशकों के लिए चुनौती बनी हुई थीं।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और NPCI की एंट्री
रिटेल विस्तार में सबसे बड़ी बाधा ऑनबोर्डिंग प्रोसेस की जटिलता थी। इसे हल करने के लिए रेगुलेटर अब पूरी तरह से डिजिटल, वीडियो-आधारित और आधार-फेस ऑथेंटिकेशन प्रोटोकॉल लागू कर रहा है। लक्ष्य यह है कि 2026 के अंत तक ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी तरह से सीमलेस हो जाए। इसके अलावा, NPCI को GIFT City में अपना ऑफिस खोलने की मंजूरी मिल गई है, जिससे इंटरनेशनल पेमेंट और रेमिटेंस कॉरिडोर और भी आसान हो जाएंगे।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
GIFT City अब केवल एक 'बुकिंग ऑफिस' की छवि से बाहर निकलकर ऑपरेशनल गहराई हासिल कर रहा है। मार्च 2026 तक यहां बैंकिंग एसेट्स $111 बिलियन से ज्यादा हो चुके हैं। इसका सीधा मतलब है कि रिटेल निवेशकों को जल्द ही ग्लोबल फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स तक आसान पहुंच मिलेगी।
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। रिटेल भागीदारी ग्लोबल मार्केट के परफॉर्मेंस पर निर्भर करेगी। साथ ही, बड़े पैमाने पर KYC और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का पालन करना और मार्केट वोलेटिलिटी से निपटना आने वाले समय में एक बड़ी जिम्मेदारी होगी।
