GIFT City में विदेशी निवेश का नया रास्ता खुला! 200 कंपनियों ने भरी उड़ान, ब्रोकर्स सबसे आगे

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AuthorAditya Rao|Published at:
GIFT City में विदेशी निवेश का नया रास्ता खुला! 200 कंपनियों ने भरी उड़ान, ब्रोकर्स सबसे आगे

GIFT City के ग्लोबल एक्सेस मॉडल के तहत अब तक **200** से ज़्यादा संस्थाएं रजिस्टर हो चुकी हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या ब्रोकर्स की है, जो भारतीय निवेशकों को विदेशी बाज़ारों तक पहुंचने में मदद कर रहे हैं। यह मॉडल RBI की लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत काम करता है।

विदेशी निवेश का 'ग्लोबल एक्सेस' मॉडल

भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल हब, GIFT City में विदेशी निवेश के लिए 'ग्लोबल एक्सेस' मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 200 के करीब संस्थाएं इस मॉडल के तहत रजिस्टर हो चुकी हैं। इनमें से 60% से 70% तक ब्रोकर और फाइनेंशियल इंटरमीडियरी हैं। करीब 18 महीने पहले शुरू किए गए इस मॉडल का मकसद भारतीय नागरिकों और एनआरआई (NRIs) के लिए विदेशी बाज़ारों में निवेश का एक सुरक्षित और रेगुलेटेड रास्ता तैयार करना है।

LRS स्कीम और GIFT City का संगम

यह ग्लोबल एक्सेस मॉडल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के नियमों के तहत काम करता है। इस स्कीम के तहत, योग्य भारतीय नागरिक सालाना $250,000 तक की राशि विदेशी निवेश के लिए भेज सकते हैं। GIFT City के ज़रिए इन ट्रांजैक्शन्स को करने से निवेशकों को एक अतिरिक्त सुरक्षा और कंप्लायंस का फायदा मिलता है, जो सीधे ऑफशोर प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने पर अक्सर नहीं मिलता। SAMCO Securities और INDmoney जैसी कंपनियां इस प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं और भारतीय ग्राहकों को यूएस स्टॉक्स, इंटरनेशनल ईटीएफ (ETFs) और अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स तक पहुंचने में मदद कर रही हैं।

ETF लिस्टिंग की नई संभावना

फिलहाल यह मॉडल ब्रोकर्स के ज़रिए निवेश की सुविधा देता है। लेकिन, IFSCA अब एक नए कदम पर विचार कर रहा है - GIFT City एक्सचेंज पर सीधे इंटरनेशनल ईटीएफ (ETFs) की लिस्टिंग। अगर यह सफल होता है, तो भारतीय निवेशक सीधे घरेलू प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके ग्लोबल फंड्स में निवेश कर पाएंगे, जिससे विदेशी ब्रोकर्स के ज़रिए निवेश करने की ज़रूरत खत्म हो जाएगी। इसका मकसद निवेशकों को थीमैटिक स्ट्रेटेजी, फिक्स्ड इनकम और मल्टी-एसेट पोर्टफोलियो जैसे ज़्यादा निवेश विकल्प मुहैया कराना है।

जोखिमों को समझना भी ज़रूरी

हालांकि, एक रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म के फायदे हैं, लेकिन विदेशी निवेश में जुड़े जोखिमों को समझना भी अहम है। सबसे बड़ा जोखिम करेंसी रिस्क (Currency Risk) है। चूंकि ये निवेश विदेशी मुद्राओं में होते हैं, इसलिए अगर भारतीय रुपया उन मुद्राओं के मुकाबले कमजोर होता है, तो इसका असर आपके रिटर्न पर पड़ सकता है। इसके अलावा, निवेशकों को LRS स्कीम के सभी RBI नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन या टैक्स रिपोर्टिंग में लापरवाही रेगुलेटरी समस्याएं पैदा कर सकती है।

आगे क्या?

क्रॉस-बॉर्डर निवेश की ऑपरेशनल हकीकत को भी ध्यान में रखना होगा। रेगुलेटेड गेटवे होने के बावजूद, सेटलमेंट प्रोसेस में इंटरनेशनल क्लियरिंग और कस्टडी संस्थानों पर निर्भरता रहती है, जो घरेलू ट्रेडिंग की तुलना में थोड़ी जटिलता जोड़ती है। बाज़ार की नजरें अब डायरेक्ट ईटीएफ लिस्टिंग के लागू होने की समय-सीमा पर टिकी हैं। साथ ही, इंडस्ट्री विदेशी निवेश केंद्रित फंडों और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) स्ट्रक्चर्स के टैक्स ट्रीटमेंट पर संभावित अपडेट का इंतजार कर रही है, जो भविष्य के बजट Announcements में आ सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.