दमदार रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क और टैक्स छूट के बावजूद GIFT City को प्राइवेट फैमिली वेल्थ जुटाने में संघर्ष करना पड़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी बाधा भारत के सख्त कैपिटल कंट्रोल नियम हैं, जो घरेलू परिवारों को अपना पैसा विदेश भेजने से रोकते हैं।
ग्रोथ में रुकावट बनी रेगुलेटरी दीवार
GIFT City एक ग्लोबल फाइनेंशियल हब के तौर पर खुद को स्थापित कर रहा है, लेकिन फैमिली इन्वेस्टमेंट फंड्स के लिए यहां स्ट्रक्चरल अड़चनें बनी हुई हैं। हालांकि, इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) ने 2025 के नए फंड मैनेजमेंट रेगुलेशंस जैसे प्रगतिशील कदम उठाए हैं, लेकिन हाई-नेट-वर्थ फैमिली वेल्थ को आकर्षित करना अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
टैक्स हॉलिडे भी नाकाफी?
कागजों पर GIFT City का ढांचा काफी प्रतिस्पर्धी है। सरकार ने यहां 20 साल की टैक्स हॉलिडे की सुविधा दी है और FEMA के तहत इसे एक विदेशी क्षेत्र जैसा दर्जा दिया गया है। फिर भी, बड़े भारतीय फैमिली ऑफिस अपने पुराने ट्रस्ट को सिंगापुर, लंदन या दुबई जैसे सेंटर्स से शिफ्ट करने में हिचकिचा रहे हैं।
कैपिटल कंट्रोल का गणित
भारतीय परिवारों के लिए सबसे बड़ी बाधा 'लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम' (LRS) और FEMA के सख्त नियम हैं। इन नियमों के चलते एक व्यक्ति एक साल में एक निश्चित राशि से ज्यादा विदेश नहीं भेज सकता। यही वजह है कि फैमिली ऑफिस अपनी पूरी वेल्थ को ग्लोबल मार्केट में डायवर्सिफाई नहीं कर पा रहे हैं।
आंकड़ों की सच्चाई
डेटा बताते हैं कि GIFT City के इकोसिस्टम में 48 आउटबाउंड-ओनली स्कीम्स के जरिए $1.1 बिलियन से ज्यादा राशि जुटाई गई है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि इसका 90% हिस्सा सिर्फ भारत-केंद्रित रणनीतियों में लगा है, न कि ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन में। LRS के जरिए अब तक लगभग $292 मिलियन ही ग्लोबल स्कीम्स में आए हैं, जो कि इस सेंटर की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के मुकाबले काफी कम है।
अगले कुछ क्वार्टर्स में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या सरकार कैपिटल मोबिलिटी के नियमों में ढील देती है या मौजूदा ऑफशोर स्ट्रक्चर्स को शिफ्ट करने के लिए कोई सरल रास्ता निकालती है।
