GIFT City अब प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए एक रणनीतिक फाइनेंशियल बेस के रूप में उभर रहा है। यहाँ विदेशी करेंसी में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने की सुविधा से निवेशकों को करेंसी रिस्क से बचने में बड़ी मदद मिल रही है।
बहुत से प्रवासी भारतीय (NRIs) अपनी कमाई तो फॉरेन करेंसी में करते हैं, लेकिन जब भारत में इंश्योरेंस लेने की बात आती है, तो उन्हें रुपये में निवेश करना पड़ता है। इसमें सबसे बड़ा रिस्क 'करेंसी वोलेटिलिटी' का होता है। यानी, अगर रुपये की वैल्यू गिरती है, तो आपकी पॉलिसी का असली कवर वैल्यू भी कम हो जाता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए GIFT City का इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) अब बीमा कंपनियों को विदेशी करेंसी में कॉन्ट्रैक्ट लिखने की छूट दे रहा है।
कैसे बदलेगा बाजार?
यह बदलाव भारतीय फाइनेंशियल सिस्टम को ग्लोबल मार्केट्स से मजबूती से जोड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर, अक्टूबर 2026 में लॉन्च हुआ Ageas Federal का 'Aurum Advantage' प्लान इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। ये मल्टी-करेंसी इंश्योरेंस प्लान्स निवेशकों को रिटायरमेंट और बच्चों की पढ़ाई जैसे लॉन्ग-टर्म गोल्स के लिए फिक्स्ड सुरक्षा देते हैं, जहाँ एक्सचेंज रेट घटने-बढ़ने का कोई डर नहीं रहता।
कूटनीतिक और आर्थिक महत्व
GIFT City अब सिर्फ एक एक्सपेरिमेंट नहीं, बल्कि एक सीरियस रेगुलेटेड ब्रिज बन गया है। सितंबर 2026 में हुई 'India-UK फाइनेंशियल मार्केट्स डायलॉग' जैसी चर्चाएं यह बताती हैं कि कैसे ग्लोबल कैपिटल मार्केट्स अब भारत के इस हब के जरिए जुड़ रहे हैं।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि, यह राह आसान नहीं है। इंश्योरेंस कंपनियों के लिए 'Asset-Liability Matching' सबसे बड़ी चुनौती है। उन्हें इस बात का ध्यान रखना होता है कि जिस करेंसी में पैसा लिया जा रहा है, निवेश भी उसी में हो, ताकि मार्केट में अचानक बदलाव आने पर नुकसान न हो। इसके अलावा, GIFT City का अपना अलग रेगुलेटरी फ्रेमवर्क है, जिससे कंपनियों को मुख्य भारतीय सिस्टम से अलग होकर काम करना पड़ता है। आने वाले समय में IFSCA के सपोर्ट और नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की रेंज ही तय करेगी कि यह मॉडल कितनी तेजी से स्केल करता है।
