GIFT City की इंटरनेशनल बैंकिंग यूनिट्स (IBUs) ने IFSCA से एक खास मांग की है। बैंक RBI की फॉरेन एक्सचेंज स्वैप फैसिलिटी के जरिए आने वाली रकम पर **5%** के ग्रीन लेंडिंग नियम में छूट चाह रहे हैं, क्योंकि भारी लिक्विडिटी के मुकाबले पर्याप्त ग्रीन प्रोजेक्ट्स की कमी है।
GIFT City स्थित इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में काम करने वाली बैंक अब नियमों में राहत की उम्मीद कर रही हैं। वर्तमान IFSCA गाइडलाइन्स के तहत, IBUs को अपने कुल लोन डिस्बर्समेंट और निवेश का कम से कम 5% हिस्सा सस्टेनेबल या ग्रीन प्रोजेक्ट्स में लगाना अनिवार्य है। अब बैंकों का कहना है कि RBI की फॉरेन एक्सचेंज स्वैप फैसिलिटी के जरिए जो भारी मात्रा में विदेशी करेंसी आ रही है, उसे इस 5% के दायरे में खपाना मुश्किल हो रहा है।
लिक्विडिटी का दबाव और चुनौतियां
आंकड़ों पर नजर डालें तो 31 अगस्त तक, GIFT IFSC की 20 IBUs ने इस स्कीम के तहत $54 बिलियन से अधिक के लोन मंजूर किए हैं, जिसमें से कुल डिस्बर्समेंट $52.82 बिलियन तक पहुंच चुका है। बैंकों का तर्क है कि क्षेत्र में इतने बड़े स्तर के फंड को ग्रीन निवेश में बदलने के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद नहीं हैं, जिससे अनुपालन (Compliance) का संकट खड़ा हो रहा है।
पिछली मिसाल और उम्मीदें
बैंकों को उम्मीद है कि उन्हें वैसी ही राहत मिल सकती है जैसी RBI ने पहले प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग और FCNR(B) डिपॉजिट्स पर कैश रिजर्व और स्टेट्युटरी लिक्विडिटी रेश्यो (SLR) में दी थी।
निवेशकों के लिहाज से यह अपडेट काफी अहम है। यदि IFSCA इस छूट को मंजूरी देता है, तो बैंकों का अनुपालन खर्च (Compliance cost) घटेगा और वे अधिक लचीलेपन के साथ कैपिटल डिप्लॉय कर पाएंगे। मार्केट अब इस बात पर नजर गड़ाए बैठा है कि रेगुलेटर पर्यावरण से जुड़ी इन जिम्मेदारियों और विदेशी मुद्रा के प्रबंधन के बीच क्या संतुलन बनाता है।
