भारत के GIFT City में बैंकिंग एसेट्स ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है और सितंबर 2026 तक यह **$193 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है। मात्र तीन महीनों में **60%** की यह उछाल विदेशी पूंजी के लिए बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है, हालांकि टैक्स नोटिस का मुद्दा निवेशकों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है।
ग्रोथ के पीछे की कहानी
गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी यानी GIFT City वैश्विक वित्तीय केंद्र बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, जून में बैंकिंग एसेट्स का आंकड़ा $120.69 बिलियन था, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर $193 बिलियन हो गया है। इस 60% की जोरदार बढ़त के पीछे विदेशी मुद्रा में लिए गए लोन और क्रेडिट मार्केट में बढ़ी गतिविधियां मुख्य कारण हैं।
इस रफ्तार को देने में Reserve Bank of India (RBI) की अहम भूमिका रही है। जून और अगस्त के बीच RBI द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेष स्वैप फैसिलिटी (Swap Facility) ने बैंकों को लिक्विडिटी सपोर्ट दिया, जिससे कामकाज में तेजी आई।
ग्लोबल दिग्गजों का जमावड़ा
GIFT City में अब HSBC, Standard Chartered और Mitsubishi UFJ Financial Group जैसे दिग्गज संस्थान सक्रिय हो गए हैं। बैंकिंग के अलावा, Mirae Asset और Jio BlackRock जैसे बड़े एसेट मैनेजर भी यहां अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। भविष्य में, Securities and Exchange Board of India (SEBI) और International Financial Services Centres Authority (IFSCA) मिलकर ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं, जिससे भारतीय कंपनियां सीधे ग्लोबल एक्सचेंज पर 'डुअल लिस्टिंग' (Dual Listing) कर सकें।
टैक्स का पेंच और चुनौतियां
सब कुछ ठीक होने के बावजूद, 'टैक्स स्थिरता' एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है। कुछ इन्वेस्टमेंट फंड्स को मिले हालिया टैक्स नोटिस ने वैश्विक निवेशकों को असहज कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि टैक्स इंसेंटिव्स में अनिश्चितता बनी रहती है, तो बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां यहां अपने विस्तार को लेकर फिर से विचार कर सकती हैं।
वर्तमान में, IFSCA इस मामले पर सरकार के साथ बातचीत कर रहा है ताकि टैक्स नियमों में स्पष्टता लाई जा सके। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इन नोटिसों का समाधान कितनी जल्दी निकलता है, क्योंकि यही GIFT City की अगली रफ्तार तय करेगा।
