GIC Housing Finance Share: ₹150 करोड़ जुटाए, पर मुनाफे में 81% गिरावट! क्या करें निवेशक?

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AuthorAditya Rao|Published at:
GIC Housing Finance Share: ₹150 करोड़ जुटाए, पर मुनाफे में 81% गिरावट! क्या करें निवेशक?
Overview

GIC Housing Finance Ltd. (GIC Housing Finance) ने **₹150 करोड़** का फंड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करके जुटाया है। इन NCDs पर **7.59%** सालाना ब्याज मिलेगा और मैच्योरिटी **2027** में होगी। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने हाउसिंग फाइनेंस बिजनेस को बढ़ाने और मौजूदा कर्ज को कम करने में करेगी। यह कदम ऐसे समय आया है जब कंपनी ने Q1 FY26 में अपने प्रॉफिट में **81%** की भारी गिरावट दर्ज की है।

फंड जुटाने की क्या है कहानी?

GIC Housing Finance ने प्राइवेट प्लेसमेंट के ज़रिए ₹150 करोड़ के NCDs जारी किए हैं। इन NCDs पर 7.59% का फिक्स्ड कूपन रेट मिलेगा और ये 470 दिनों के बाद, यानी जून 2027 में मैच्योर होंगे। कंपनी का कहना है कि इस फंड का मुख्य मकसद हाउसिंग फाइनेंस ऑपरेशंस का विस्तार करना, ग्राहकों को लोन देना और अपने मौजूदा कर्ज को रिफाइनेंस या चुकाना है।

नतीजों पर एक नज़र: गिरावट की वजह?

हालिया नतीजों पर गौर करें तो कंपनी की कुल आय Q1 FY26 में ₹265.44 करोड़ रही, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 4.2% कम है। हालांकि, सबसे चिंताजनक बात यह है कि कंपनी का नेट प्रॉफिट (Profit After Tax - PAT) 81.0% गिरकर सिर्फ ₹7.42 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल Q1 FY25 में यह ₹38.99 करोड़ था। इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण प्रोविज़न्स (Provisions) में भारी बढ़ोतरी रही। कंपनी ने एक्स्पेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) मेथोडोलॉजी में बदलाव और एसेट्स के एकमुश्त री-क्लासिफिकेशन की वजह से फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स के इम्पेयरमेंट के लिए ज्यादा पैसा अलग रखा है। इसी के साथ, कंपनी के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) भी बढ़कर 4.7% (30 जून 2025 तक) हो गए हैं, जो 31 मार्च 2025 को 3.0% थे। इन चुनौतियों के बावजूद, कंपनी का गियरिंग (Gearing) 4.4 गुना (30 जून 2025 तक) पर बना हुआ है, जो एक हद तक संतोषजनक है।

रिस्क और भविष्य की राह

कंपनी की क्रेडिट रेटिंग भले ही CRISIL और ICRA से AA+/Stable जैसी मजबूत हो, लेकिन नतीजों में एसेट क्वालिटी और प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर कुछ सवाल उठ रहे हैं। NCDs के लिस्टिंग के बाद उनके एक्टिव ट्रेडिंग की कोई गारंटी नहीं है। साथ ही, हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में जबरदस्त कॉम्पिटिशन भी एक बड़ी चुनौती है। कंपनी को दिसंबर 2020 में नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) से रिटर्न फाइल करने में देरी पर ₹47,000 का जुर्माना भी भुगतना पड़ा था।

सेक्टर का आउटलुक और कंपेरिजन

GIC Housing Finance, LIC Housing Finance और HDFC जैसे बड़े खिलाड़ियों के साथ कॉम्पिटिटिव हाउसिंग फाइनेंस मार्केट में काम करती है। LIC Housing Finance के मुकाबले, GIC Housing Finance सेल्स ग्रोथ, प्रॉफिट ग्रोथ, ROE और ROCE जैसे कई फाइनेंशियल पैरामीटर्स पर पीछे नजर आती है। LIC Housing Finance की मार्केट कैपिटलाइजेशन भी बड़ी है और उसके प्रॉफिट ग्रोथ में ज्यादा कंसिस्टेंसी देखी गई है।

हालांकि, भारतीय हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं हैं। ICRA के मुताबिक, यह सेक्टर वित्त वर्ष 2023 से 2027 के बीच 13-15% सीएजीआर (CAGR) की दर से बढ़ सकता है। ऐसे में, GIC Housing Finance को अपनी प्रॉफिटेबिलिटी और एसेट क्वालिटी की चिंताओं को दूर करना होगा ताकि वह इस सेक्टर की ग्रोथ का पूरा फायदा उठा सके।

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