RBI का बड़ा कदम, G+D की नई रणनीति
1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए निर्देश ने G+D को भारत में पासकी (Passkeys) को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए प्रेरित किया है। इस नियम के मुताबिक, हर डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ज़रूरी होगा, जिसमें कम से कम एक डायनामिक फैक्टर शामिल हो। यह G+D की बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन तकनीक के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है।
पासकी से ट्रांजेक्शन होंगे ज़्यादा सुरक्षित
फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान जैसे बायोमेट्रिक सॉल्यूशंस, वन-टाइम पासवर्ड (OTP) के मुकाबले कहीं ज़्यादा सुरक्षित माने जाते हैं। OTP में अक्सर देरी और धोखाधड़ी का खतरा रहता है। RBI का यह कदम ट्रांजेक्शन फेल होने की दर को मौजूदा 35% से घटाकर 95% तक लाने में मदद कर सकता है।,
मार्केट तैयार, Competitors भी उतरे
यह बदलाव सिर्फ G+D तक सीमित नहीं है। ग्लोबल पेमेंट दिग्गज Mastercard और Visa भी भारत में पासकी सेवाओं को इंटीग्रेट कर रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि भारतीय बाज़ार इस नई तकनीक को अपनाने के लिए तैयार है।
भारत: ग्रोथ और इनोवेशन का हब
G+D के लिए भारत एक महत्वपूर्ण बाज़ार है। कंपनी की भारतीय सब्सिडियरी का रेवेन्यू फाइनेंशियल ईयर 2025 में करीब ₹390 करोड़ (USD 47 मिलियन) रहा, जो कि एक बड़ी स्थानीय उपस्थिति का संकेत है। वहीं, कंपनी का ग्लोबल रेवेन्यू फाइनेंशियल ईयर 2024 में EUR 3.132 बिलियन तक पहुंचा। भारत का डिजिटल पेमेंट बाज़ार G+D की ग्लोबल स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है और यह 22% से ज़्यादा की सालाना ग्रोथ रेट के साथ 2034 तक USD 52 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। कंपनी पुणे स्थित अपने R&D सेंटर का इस्तेमाल भारत और दुनिया भर के लिए नए इनोवेशन विकसित करने के लिए कर रही है।
बायोमेट्रिक से आगे: प्रीमियम कार्ड और नई सेवाएं
G+D, Gemalto और De La Rue जैसी कंपनियों के साथ एक कॉम्पिटिटिव मार्केट में काम कर रहा है। लेकिन G+D सिर्फ बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पर ही नहीं रुक रहा। वे बैंकों के लिए मेटल, इको-फ्रेंडली या रीसाइक्लेबल जैसे प्रीमियम कार्ड्स और AI-जेनरेटेड इमेज या बेहतर कार्ड स्टॉक मैनेजमेंट जैसी नई सेवाएं भी एक्सप्लोर कर रहे हैं।
चुनौतियां और रिस्क
भारत का डिजिटल पेमेंट बाज़ार मुख्य रूप से सस्ते UPI सिस्टम पर चलता है, जो पारंपरिक कार्ड नेटवर्क के लिए एक बड़ी चुनौती है। बायोमेट्रिक स्पूफिंग या डिवाइस कॉम्प्रोमाइज जैसे सुरक्षा जोखिम भी मौजूद हैं। इसके अलावा, भारत में डिजिटल गैप की वजह से सभी यूजर्स के पास पासकी के लिए आवश्यक बायोमेट्रिक क्षमताएं नहीं हैं, जिससे कुछ यूज़र्स बाहर रह सकते हैं। G+D को भारत में अपनी वैश्विक ताकत को लोकल मार्केट शेयर में बदलने के लिए अभी काफी स्केल अप करना होगा।
G+D का विज़न
भारत में पासकी को तैनात करने पर G+D का मज़बूत फोकस, देश को एक प्रमुख डिजिटल इकोनॉमी बनाने की दिशा में एक रणनीतिक चाल है। कंपनी अपनी SecurityTech पोर्टफोलियो के ज़रिए टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश करने की योजना बना रही है, ताकि अरबों यूज़र्स के लिए ज़्यादा सुरक्षित और सहज डिजिटल फाइनेंसियल अनुभव सुनिश्चित किया जा सके।