Fusion Finance ने Q1FY27 में शानदार वापसी की है, पिछले साल के घाटे को पछाड़कर **₹62.4 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है। ब्रोकरेज फर्म ICICI सिक्योरिटीज ने कंपनी पर 'Buy' रेटिंग के साथ **₹240** का टारगेट प्राइस सेट किया है। अब निवेशक कंपनी की नए लोन सेगमेंट में विस्तार की रणनीति पर नज़रें गड़ाए हुए हैं।
Fusion Finance के मुनाफे में कैसे आई उछाल?
Fusion Finance पहली तिमाही (Q1FY27) के नतीजों के बाद चर्चा में है। कंपनी ने ₹62.4 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹92.25 करोड़ के घाटे से एक बड़ा बदलाव है। इस शानदार प्रदर्शन के बाद, ब्रोकरेज फर्म ICICI सिक्योरिटीज ने स्टॉक पर 'Buy' रेटिंग जारी की है और शेयर के लिए ₹240 का टारगेट प्राइस तय किया है।
बेहतर मार्जिन और एसेट क्वालिटी
कंपनी के प्रदर्शन में सुधार का मुख्य कारण लोन बुक को मैनेज करने में बेहतर एफिशिएंसी है। कंपनी की ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 2.51% पर आ गई है, जो लोन की समय पर रिकवरी में सुधार का संकेत है। वहीं, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM), जो कंपनी की उधारी गतिविधियों से होने वाली कमाई को दर्शाता है, बढ़कर 11.93% हो गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2025 में मैनेजमेंट में बदलाव के बाद शुरू किए गए बिजनेस मॉडल में सुधार दिखने लगा है।
नए प्रोडक्ट्स और भविष्य की रणनीति
Fusion Finance अब अपने बिजनेस को डायवर्सिफाई करने पर फोकस कर रही है। कंपनी के बोर्ड ने 10 अगस्त, 2026 को 'इंडिविजुअल लोन' (Individual Loans) प्रोडक्ट लॉन्च करने की मंजूरी दी है। इसका मकसद पारंपरिक माइक्रोफाइनेंस प्रोडक्ट्स पर निर्भरता कम करना है। मैनेजमेंट का लक्ष्य FY27 के अंत तक एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) को ₹10,000 करोड़ तक पहुंचाना है। इस कदम से नए कस्टमर सेगमेंट तक पहुंचने और टिकाऊ ग्रोथ हासिल करने की उम्मीद है।
जोखिमों पर भी रखें नज़र
हालांकि, कंपनी के नतीजों में सुधार दिख रहा है, लेकिन माइक्रोफाइनेंस सेक्टर से जुड़े जोखिमों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। कंपनी का प्रदर्शन कलेक्शन एफिशिएंसी पर बहुत निर्भर करता है, जो 99% से ऊपर बनी हुई है। इसमें किसी भी तरह की रुकावट एसेट क्वालिटी को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, नए 'इंडिविजुअल लोन' प्रोडक्ट में एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) भी है, क्योंकि कंपनी को इस नए सेगमेंट में सफलतापूर्वक कलेक्शन साबित करना होगा। माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री आर्थिक चक्रों और रेगुलेटरी बदलावों के प्रति भी संवेदनशील रहती है, जो लिक्विडिटी और लेंडिंग मार्जिन को प्रभावित कर सकते हैं। भविष्य का प्रदर्शन कंपनी की मार्जिन बनाए रखने की क्षमता और मुख्य बिजनेस के साथ नए प्रोडक्ट की स्केलिंग पर निर्भर करेगा।
