Franklin Templeton CEO की चेतावनी: ब्लॉकचेन खत्म कर देगा बैंकों की कमाई! जानें कैसे?

BANKINGFINANCE
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AuthorAditya Rao|Published at:
Franklin Templeton CEO की चेतावनी: ब्लॉकचेन खत्म कर देगा बैंकों की कमाई! जानें कैसे?
Overview

Franklin Templeton की CEO, जेनी जॉनसन ने आगाह किया है कि पारंपरिक फाइनेंस कंपनियां ब्लॉकचेन को अपनाने से कतरा रही हैं। इसकी वजह है - ब्लॉकचेन से होने वाला इंस्टेंट सेटलमेंट और बिचौलियों का कम होना, जो बैंकों के मोटे कमीशन और फीस को खत्म कर सकता है। कंपनी अपने Benji टोकनाइज्ड मनी मार्केट फंड के ज़रिए इस बात का टेस्ट कर रही है, और पुराने सिस्टम के मुकाबले लागत में बड़ी कटौती दिखा रही है।

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पारंपरिक कंपनियों के सामने दुविधा

एसेट मैनेजर (Asset Manager) और बैंक इन दिनों कई चरणों वाली पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उन्हें ट्रांजैक्शन फीस (Transaction Fee) और फ्लोट मैनेजमेंट (Float Management) से तगड़ी कमाई होती है। इन सिस्टम में आने वाली दिक्कतें सिर्फ टेक्नोलॉजी की कमी नहीं, बल्कि कमाई का जरिया भी हैं। Franklin Templeton की CEO, जेनी जॉनसन के मुताबिक, पब्लिक ब्लॉकचेन के आने से इन सर्विस कॉस्ट पर दबाव आएगा और पारंपरिक बिचौलियों का रोल कम हो जाएगा। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ कंपनियां एक तरफ तो अपनी टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित होती हैं, वहीं दूसरी तरफ वे अपनी कमाई के मुख्य जरियों को खोने से डरती हैं।

टोकनाइजेशन का गणित

Franklin Templeton का Benji मनी मार्केट फंड एक बड़ा प्रयोग है। अपने फंड के सिस्टम को Stellar नेटवर्क पर ले जाकर, कंपनी ने ट्रांजैक्शन की लागत को काफी कम कर दिया है। जब यह 50,000 ट्रांजैक्शन तक पहुँचता है, तो पुराने बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Banking Infrastructure) और डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (Distributed Ledger Technology) के बीच लागत का अंतर इतना बड़ा हो जाता है कि यह मौजूदा कॉम्पिटिटिव एडवांटेज (Competitive Advantage) को खत्म कर सकता है। हालाँकि अंदरूनी तौर पर लागत कम हुई है, लेकिन इसका असर यह होगा कि बड़े क्लाइंट्स (Institutional Clients) भी हर तरह की एसेट पर इसी तरह की एफिशिएंसी (Efficiency) की मांग करेंगे, जिससे उन कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा जो अभी भी महंगी, पुरानी टेक्नोलॉजी पर निर्भर हैं।

स्ट्रक्चरल रिस्क और मार्केट की दिक्कतें

ब्लॉकचेन की तरफ बढ़ने का मतलब सिर्फ टेक्नोलॉजी का बदलना नहीं, बल्कि कानूनी और रेगुलेटरी (Regulatory) बदलाव भी है। बड़ी कंपनियों के लिए सेंट्रलाइज्ड कस्टोडियन (Centralized Custodian) पर निर्भरता ही इसे अपनाने में सबसे बड़ी रुकावट है। इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Institutional Investors) कड़े नियमों के तहत काम करते हैं, जिन्हें डिजिटल एसेट्स (Digital Assets) पर रेगुलेटरी निगरानी की ज़रूरत होती है। इसलिए, भले ही टेक्नोलॉजी फीस कम करने का रास्ता दिखाती है, लेकिन रेगुलेटरी नियमों को पूरा करने के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर नए खर्चे आते हैं। जो कंपनियां पब्लिक लेजर पर जाने के साथ-साथ भरोसेमंद कस्टोडियल सेवाएं (Custodial Services) नहीं दे पाएंगी, वे घटते मार्जिन (Shrinking Margins) और पुरानी रिकंसीलिएशन (Reconciliation) की लागत के बीच फंस सकती हैं।

कॉम्पिटिटिव आउटलुक (Competitive Outlook)

क्रिप्टो फर्मों के उलट, जो प्राइवेसी को प्राथमिकता देती हैं, पारंपरिक फंड मैनेजर एक संभली हुई राह पर चल रहे हैं। वे पब्लिक ब्लॉकचेन को रेगुलेटरी ढांचे के अंदर इस्तेमाल कर रहे हैं। BlackRock और Fidelity जैसी कंपनियां भी टोकनाइजेशन (Tokenization) का टेस्ट कर रही हैं, जो एक ऐसे मार्केट की ओर इशारा करता है जहाँ ऑन-चेन एफिशिएंसी लागत के मामले में एक पैमाना बन जाएगी। पुराने प्लेयर्स के लिए लंबे समय का खतरा सिर्फ ट्रांजैक्शन रेवेन्यू (Transaction Revenue) खोना नहीं, बल्कि स्मार्ट-कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम (Smart-contract Systems) द्वारा मौजूदा कस्टोडियल और फंड एडमिनिस्ट्रेशन (Fund Administration) को बेकार कर देना है। जैसे-जैसे रेगुलेटरी माहौल बदलेगा, बढ़ती पारदर्शिता वाले ऑन-चेन सिस्टम में पुरानी फीस बनाए रखना एसेट मैनेजमेंट सेक्टर (Asset Management Sector) में वैल्यूएशन (Valuation) तय करने का एक बड़ा मुद्दा बन जाएगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.