सुप्रीम कोर्ट ने Fortis Healthcare के लिए एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि पिछली कानूनी टिप्पणियां अब मान्य नहीं होंगी, जिससे कंपनी को पूर्व प्रमोटर्स सिंह बंधुओं के विवादों से दूर होने में मदद मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने Fortis Healthcare के कामकाज को लेकर एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश देकर कंपनी को बड़ी स्पष्टता दी है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पहले की गई टिप्पणियां केवल अस्थायी थीं और उनका असर नई जांच पर नहीं पड़ेगा। यह कानूनी अपडेट उन अनिश्चितताओं को खत्म करता है, जो लंबे समय से कंपनी पर छाई हुई थीं।
सिंह बंधुओं के दौर से आगे बढ़ती कंपनी
यह फॉरेंसिक ऑडिट जापानी दिग्गज Daiichi Sankyo और कंपनी के पूर्व प्रमोटर्स मालविंदर और शिविंदर सिंह के बीच लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद का नतीजा है। Fortis का कहना है कि वह उस आर्बिट्रेशन का हिस्सा नहीं थी और उस पर कोई देनदारी नहीं बनती।
साल 2018 में सिंह बंधुओं के जाने के बाद, कंपनी का पूरा मैनेजमेंट बदल चुका है। अब IHH Healthcare Berhad इसकी मुख्य प्रमोटर है। इस बदलाव के बाद कंपनी ने प्रोफेशनल मैनेजमेंट और बेहतर गवर्नेंस पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया है।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
निवेशकों के लिए पूर्व प्रमोटर्स से जुड़ा कानूनी विवाद हमेशा चिंता का विषय रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कॉरपोरेट गवर्नेंस के नजरिए से काफी सकारात्मक है। अब मैनेजमेंट का पूरा फोकस हॉस्पिटल के कामकाज और विस्तार पर है। फॉरेंसिक ऑडिट के नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी, लेकिन इस नए स्वतंत्र ऑडिट से कंपनी के इतिहास की एक निष्पक्ष तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
