Flipkart का सपोर्ट! super.money लाया 'splitStore', अब बिना ब्याज के करें शॉपिंग

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Flipkart का सपोर्ट! super.money लाया 'splitStore', अब बिना ब्याज के करें शॉपिंग

Flipkart से समर्थित फिनटेक कंपनी super.money ने 'splitStore' लॉन्च किया है। यह एक इन-ऐप मार्केटप्लेस है जो 60 लाख से ज़्यादा प्रोडक्ट्स पर जीरो-इंटरेस्ट (बिना ब्याज) पर ईएमआई की सुविधा देगा।

'splitStore' के साथ फिनटेक का ई-कॉमर्स में कदम

Flipkart का सपोर्ट रखने वाली फिनटेक फर्म super.money ने 'splitStore' नाम के अपने नए प्लेटफॉर्म के साथ ई-कॉमर्स में एंट्री कर ली है। यह इन-ऐप मार्केटप्लेस ग्राहकों को इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन और होम एप्लायंसेज जैसे ढेरों प्रोडक्ट्स को ज़ीरो-इंटरेस्ट (बिना ब्याज) वाली इंस्टॉलमेंट पर खरीदने की सुविधा देता है। यह सर्विस Scapic Innovations Private Limited द्वारा ऑपरेट की जा रही है, जो super.money ऐप के पीछे की कंपनी है।

बिजनेस मॉडल और स्ट्रेटेजी

'splitStore' का मॉडल क्रेडिट-फैसिलिटेशन इंटरफ़ेस के तौर पर डिज़ाइन किया गया है। यह सिर्फ पेमेंट प्रोसेस करने की बजाय, सीधे पॉइंट-ऑफ-सेल पर शॉपिंग को क्रेडिट ऑप्शन्स के साथ जोड़ता है। Flipkart के बड़े डिलीवरी नेटवर्क और इन्वेंटरी का फायदा उठाते हुए, super.money का लक्ष्य अपने यूज़र्स के लिए शॉपिंग एक्सपीरियंस को आसान बनाना है। कंपनी का कहना है कि वे डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स को जोड़कर अपने प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाने वाले हैं, जो साल के अंत तक ऑफर किए जाने वाले प्रोडक्ट्स का एक बड़ा हिस्सा होंगे।

बिजनेस के नज़रिए से, कंपनी 10-12% का मार्जिन टारगेट कर रही है, जो कि सामान्य चेकआउट फाइनेंस मॉडल्स में दिखने वाले 2-3% मार्जिन से काफी ज़्यादा है। कंपनी यूज़र्स की क्रेडिट योग्यता का बेहतर आकलन करने के लिए उनके शॉपिंग डेटा का इस्तेमाल करना चाहती है, ताकि वे ज़्यादा पर्सनलाइज्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स ऑफर कर सकें।

रिस्क और मार्केट की चुनौतियाँ

प्लेटफॉर्म भले ही ग्रोथ की ओर देख रहा हो, लेकिन इसे डिजिटल लेंडिंग स्पेस के आम रिस्क का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता क्रेडिट रिस्क की है। Gen Z और पहली बार क्रेडिट लेने वाले यूज़र्स को टारगेट करके, कंपनी डिफॉल्ट के खतरे को बढ़ा रही है। पहली इंस्टॉलमेंट के लिए डाउन पेमेंट लेना इस जोखिम को कम करने की एक रणनीति है, लेकिन इस सेगमेंट की रिपेमेंट परफॉरमेंस पर कड़ी नज़र रखनी होगी।

दूसरा अहम फैक्टर रेगुलेटरी दबाव है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार डिजिटल लेंडिंग, डेटा प्राइवेसी और KYC नॉर्म्स को लेकर नियम कड़े कर रहा है। इन नियमों में कोई भी बदलाव super.money जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म के ऑपरेशन्स या क्रेडिट ऑफरिंग को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, कंपनी को पेमेंट और क्रेडिट स्पेस में PhonePe, Paytm और बैंक-बेक्ड क्रेडिट सॉल्यूशंस जैसे बड़े प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। Flipkart की लॉजिस्टिक्स और इन्वेंटरी पर भारी निर्भरता एक कंसंट्रेशन रिस्क भी पैदा करती है, क्योंकि इसका ऑपरेशन पेरेंट कंपनी के इकोसिस्टम से गहराई से जुड़ा हुआ है।

निवेशक और विश्लेषक इस बात पर बारीकी से नज़र रखेंगे कि super.money इन क्रेडिट रिस्क को कितनी अच्छी तरह मैनेज कर पाता है और क्या वह इस कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अपने टारगेट मार्जिन को बनाए रख सकता है। नई D2C ब्रांड्स को जोड़ने और Flipkart नेटवर्क के माध्यम से सुचारू ऑपरेशन्स बनाए रखने की कंपनी की क्षमता उसके विस्तार में अगला बड़ा कदम होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.