Flipkart से समर्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म super.money ने 'splitStore' नाम से एक नई सर्विस शुरू की है। यह उन लोगों के लिए है जिनका कोई क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है, और वे तीन आसान किश्तों में सामान खरीद सकते हैं। यह कंपनी की कमाई के नए रास्ते खोलने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
Flipkart के सपोर्ट वाले Super.money ने लॉन्च किया 'splitStore'
Flipkart से समर्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म super.money (Scapic Innovations द्वारा संचालित) ने 'splitStore' नाम से एक नई सुविधा पेश की है। इसके जरिए यूजर्स अपनी खरीदारी का भुगतान तीन आसान किश्तों में कर सकते हैं। यह प्रोडक्ट खास तौर पर 'न्यू-टू-क्रेडिट' यानी उन ग्राहकों के लिए है जिनका कोई क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है या जिनके पास पारंपरिक लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए पर्याप्त वित्तीय डेटा नहीं है।
कमाई का बदला जाएगा फॉर्मूला
यह लॉन्च कंपनी के लिए एक बड़ी रणनीतिक बदलाव का संकेत है। CEO प्रकाश सिकारिया ने बताया कि फिलहाल कंपनी की 80% से 90% कमाई क्रेडिट प्रोडक्ट जैसे पर्सनल लोन से होती है। 'splitStore' जैसी कॉमर्स-लिंक्ड सर्विस के जरिए, कंपनी इस निर्भरता को कम करना चाहती है। मैनेजमेंट का लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक क्रेडिट प्रोडक्ट से 60% रेवेन्यू आए, जबकि पेमेंट्स और कॉमर्स-लिंक्ड ऑफरिंग से 20-20% रेवेन्यू का लक्ष्य रखा गया है।
'क्लोज्ड-लूप' सिस्टम से रिस्क कम
ऑपरेशनल तौर पर, प्लेटफॉर्म इन क्रेडिट ट्रांजैक्शन के लिए 'क्लोज्ड-लूप' सिस्टम का इस्तेमाल करता है। यानी, यह क्रेडिट पारंपरिक क्रेडिट कार्ड की तरह कहीं भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, बल्कि यह चुनिंदा प्रोडक्ट्स तक ही सीमित है। इस सिस्टम से प्लेटफॉर्म के लिए ट्रांजैक्शन रिस्क कम होगा, क्योंकि उधार देने वाली संस्था का खर्च पर ज्यादा कंट्रोल रहेगा। यूजर्स की शुरुआत ₹1,000 से ₹2,000 की छोटी क्रेडिट लिमिट से होती है, जो उनके रीपेमेंट के व्यवहार के आधार पर बढ़ाई जा सकती है।
NBFCs और बैंकों के साथ साझेदारी
इस बिजनेस मॉडल में, असल क्रेडिट देने के लिए रेगुलेटेड एंटिटीज, खासकर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFCs) और बैंकों के साथ साझेदारी की जाती है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिजिटल लेंडिंग से जुड़े बदलते नियमों के जवाब में है, जो पारदर्शिता की मांग करते हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेटेड लेंडर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए कहते हैं।
चुनौतियां और भविष्य
हालांकि कंपनी इस सर्विस को अन्य ई-कॉमर्स और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स तक फैलाने की योजना बना रही है, लेकिन इस सेगमेंट में कई चुनौतियां हैं। भारतीय फिनटेक सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा है और 'न्यू-टू-क्रेडिट' सेगमेंट स्वाभाविक रूप से ज्यादा जोखिम भरा है, क्योंकि इन यूजर्स के पास रीपेमेंट की विश्वसनीयता का अनुमान लगाने के लिए जरूरी वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड की कमी होती है। इस मॉडल की सफलता कंपनी की डिफॉल्ट रिस्क को प्रभावी ढंग से मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगी, साथ ही Flipkart इकोसिस्टम और उससे आगे इंटीग्रेशन को बढ़ाने पर भी।
