पेमेंट में क्यों हो रहा है ये बदलाव?
डिजिटल पेमेंट में बढ़ते फ्रॉड (fraud) को देखते हुए यह बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि SMS OTP जैसे पारंपरिक तरीकों की जगह बायोमेट्रिक (biometric) या जोखिम-आधारित (risk-based) ऑथेंटिकेशन जैसे मजबूत तरीके अपनाए जाएं।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
इस सिस्टम में इश्यूअर-लेवल बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (issuer-level biometric verification) और डिवाइस बाइंडिंग (device binding) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये ऑनलाइन पेमेंट्स को और भी तेज़ और सुरक्षित बनाने का वादा करते हैं। इससे SIM-स्वैप अटैक्स (SIM-swap attacks) और OTP इंटरसेप्शन (OTP interception) जैसे आम फ्रॉड से बचने में मदद मिलेगी।
पार्टनरशिप में किसकी क्या भूमिका?
इस पार्टनरशिप के तहत, PayU मर्चेंट पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर (merchant payment infrastructure) और ऑथेंटिकेशन की ज़िम्मेदारी संभालेगा। वहीं, Axis Bank Wibmo (जो PayU की ही एक कंपनी है) का इस्तेमाल करते हुए इश्यूअर साइड से बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का काम देखेगा, जिससे एक सुरक्षित एंड-टू-एंड (end-to-end) प्रोसेस सुनिश्चित होगा।
ग्राहकों को क्या मिलेगा फायदा?
कंपनियों का कहना है कि इस सुविधा से सुरक्षा से कोई समझौता किए बिना ट्रांजैक्शन (transaction) में आने वाली रुकावटें कम होंगी। Flipkart इसे सेफ ऑनलाइन कॉमर्स (safer online commerce) की दिशा में एक अहम कदम मान रहा है, जबकि Axis Bank ग्राहकों को सुगम अप्रूवल (smoother approvals) और पेमेंट को और भी सरल बनाने की बात कह रहा है।
