अगर आपकी Fixed Deposit मैच्योर हो गई है और आप उसे रिन्यू या विड्रॉल नहीं कर रहे हैं, तो यह आपकी कमाई के लिए नुकसानदेह हो सकता है। RBI के नियमों के मुताबिक, मैच्योरिटी के बाद ब्याज दरें काफी कम हो जाती हैं और लंबे समय तक बिना दावे वाली रकम DEA फंड में ट्रांसफर की जा सकती है।
बहुत से निवेशक Fixed Deposits (FDs) को 'सेट-एंड-फॉरगेट' यानी एक बार निवेश करके भूल जाने वाली स्कीम मानते हैं। लेकिन यह सोचना कि मैच्योरिटी के बाद भी पैसा उसी ऊंची दर से ब्याज कमाता रहेगा, एक बड़ी गलती है जो आपके मुनाफे को सीधे चोट पहुँचाती है।
ब्याज दरों में बड़ी गिरावट
Reserve Bank of India (RBI) के नियमों के अनुसार, जैसे ही FD की मैच्योरिटी डेट आती है और पैसा विड्रॉल या रिन्यू नहीं किया जाता, तो वह फंड 'Overdue' (बकाया) कैटेगरी में चला जाता है। इस दौरान, बैंक आपको अब फिक्स्ड डिपॉजिट वाली ऊंची दर नहीं, बल्कि बैंक के सेविंग्स अकाउंट की दर के बराबर या उससे कम ब्याज देता है। चूंकि सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरें अमूमन FD से काफी कम होती हैं, इसलिए आपका पैसा अपनी पूरी क्षमता से कमाई नहीं कर पाता और रिटर्न घट जाता है।
इनऑपरेटिव अकाउंट और DEA फंड का खतरा
अगर आप 2 साल तक अपने अकाउंट में कोई ट्रांजेक्शन नहीं करते हैं, तो बैंक इसे 'Inoperative' घोषित कर सकता है। इससे आपकी डिजिटल बैंकिंग सेवाएं रुक सकती हैं और आपको अकाउंट फिर से चालू करवाने के लिए बैंक ब्रांच के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
सबसे गंभीर स्थिति तब आती है जब पैसा 10 साल या उससे ज्यादा समय तक बिना दावे (unclaimed) के पड़ा रहता है। कानून के मुताबिक, बैंक इस राशि को RBI के 'Depositor Education and Awareness (DEA) Fund' में ट्रांसफर कर देता है। हालांकि आपका पैसा डूबता नहीं है, लेकिन इसे वापस पाने की प्रक्रिया बेहद जटिल और कागजी झंझटों से भरी हो जाती है।
मैच्योरिटी इंस्ट्रक्शन का रखें ध्यान
इस नुकसान से बचने का सबसे अच्छा तरीका है FD खोलते समय 'Auto-renewal' या 'Auto-payout' के विकल्प को सही से चुनना। समय-समय पर अपने मैच्योरिटी इंस्ट्रक्शंस को चेक करते रहें। यदि आपकी वित्तीय जरूरतें बदल गई हैं, तो बैंक में जाकर इन सेटिंग्स को अपडेट करें। साथ ही, अपनी ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर को हमेशा अपडेट रखें ताकि मैच्योरिटी की सूचना आपको समय पर मिल सके और आप अपने पैसे को बेहतर स्कीम में री-इन्वेस्ट कर सकें।
