UAE का सबसे बड़ा लेंडर, First Abu Dhabi Bank (FAB), भारत के किसी प्राइवेट बैंक में **51%** हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रहा है। यह कदम बैंक की भारत में अपनी पैठ जमाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
भारत पर है गल्फ बैंकों की नजर
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का दिग्गज लेंडर First Abu Dhabi Bank (FAB) भारत के बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है। बैंक भारतीय प्राइवेट बैंकों में 51% की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी हासिल करने के लिए अवसरों की तलाश कर रहा है। FAB पहले से ही मुंबई और GIFT सिटी में अपनी मौजूदगी के साथ भारत में काम कर रहा है और अब तक करीब $1.5 बिलियन के FCNR-B डिपॉजिट जुटा चुका है।
वैल्युएशन का गणित और बाजार के संकेत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, FAB उन बैंकों को प्राथमिकता दे रहा है जिनके शेयर अपनी बुक वैल्यू (Book Value) के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है: भले ही यह एंट्री के लिए एक सस्ता विकल्प हो, लेकिन शेयर का बुक वैल्यू पर ट्रेड करना अक्सर बाजार की उन चिंताओं को दर्शाता है जो बैंक के प्रॉफिट, एसेट क्वालिटी या गवर्नेंस को लेकर हो सकती हैं। ऐसे में डील की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि क्या FAB इन कमियों को सुधार पाएगा।
रेगुलेटरी राह आसान नहीं
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में किसी विदेशी संस्था का मालिक बनना इतना आसान नहीं है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कड़े नियम और 'फिट एंड प्रॉपर' (Fit and Proper) क्राइटेरिया के तहत इस डील की गहन जांच की जाएगी। RBI यह सुनिश्चित करने के लिए काफी सतर्क रहता है कि ओनरशिप बदलने से बैंकिंग सिस्टम की स्थिरता पर कोई असर न पड़े।
क्यों बढ़ रही है होड़?
यह कदम ईस्ट-वेस्ट ट्रेड कॉरिडोर में अपनी भूमिका मजबूत करने की एक बड़ी लहर का हिस्सा है। इससे पहले भी Emirates NBD जैसी मिडिल ईस्ट की कंपनियां भारतीय बैंकिंग सेक्टर में रुचि दिखा चुकी हैं। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि FAB आखिर किस भारतीय बैंक को चुनता है और RBI की मंजूरी पाने में उसे कितनी मशक्कत करनी पड़ती है।
