कई स्टार्टअप्स अब रेंट पेमेंट के डेटा का इस्तेमाल 'क्रेडिट स्कोर' बनाने में कर रहे हैं ताकि नए कर्जदारों को लोन मिल सके। हालांकि, RBI की सख्ती और बैंकों की हिचकिचाहट के चलते इस बिजनेस मॉडल के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
बहुत से युवाओं और गिग वर्कर्स के लिए लोन हासिल करना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि उनका 'क्रेडिट फाइल' बहुत कमजोर होती है। हर महीने समय पर किराया और बिल चुकाने के बावजूद, यह डेटा फॉर्मल बैंकिंग सिस्टम का हिस्सा नहीं बन पाता। इसी समस्या को हल करने के लिए RentenPe जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म रेंट पेमेंट को ट्रैक करके एक नया 'रेंट स्कोर' पेश कर रहे हैं। इनका मानना है कि यह स्कोर लोगों को लोन और क्रेडिट कार्ड दिलाने में मददगार साबित होगा।
RBI की सख्ती और चुनौतियां
इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ी बाधा 2025 में आया RBI का नया नियम है। रेगुलेटर ने पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए गाइडलाइंस कड़ी कर दी हैं, जिससे रेंट चुकाने के लिए क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर काफी पाबंदी लग गई है। इसका सीधा असर इन स्टार्टअप्स के ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर पड़ा है।
बैंकों का नजरिया और भविष्य
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कमर्शियल बैंक इन अल्टरनेटिव स्कोर पर भरोसा करेंगे? फिलहाल, बैंकों का पूरा दारोमदार CIBIL, Experian और CRIF जैसे मान्यता प्राप्त क्रेडिट ब्यूरो पर है। RBI ने इन ब्यूरो को 15 दिन में डेटा अपडेट करने का निर्देश दिया है और जुलाई 2026 तक इसे 'वीकली' करने का लक्ष्य है। यह सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर फिनटेक के निजी स्कोरिंग मॉडल के लिए बड़ी प्रतिस्पर्धा पेश कर रहा है। निवेशकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बैंक आने वाले समय में रेंट स्कोर को लोन प्रक्रिया में शामिल करते हैं या RBI के ब्यूरो वाला सिस्टम ही मानक बना रहता है।
