UPI ट्रांजैक्शन अब पहले जैसे मुफ्त नहीं रहेंगे। **₹2,000** से ज्यादा के लेनदेन पर **0.4%** का मर्चेंट फी लगाने के फैसले को फिनटेक कंपनियों ने मंजूरी दे दी है।
बड़ा बदलाव: जीरो-फी मॉडल का अंत
डिजिटल पेमेंट के लिए अब एक नए दौर की शुरुआत हो रही है। 15 अक्टूबर, 2026 से UPI के जरिए ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। यह 2020 से चले आ रहे 'जीरो-फी' मॉडल के बाद सबसे बड़ा बदलाव है। फिनटेक दिग्गज जैसे Groww, BharatPe, MobiKwik और Fam ने इस फैसले को सही ठहराया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के CEO दिलीप अस्बे के साथ हुई मीटिंग के बाद इंडस्ट्री ने साफ कर दिया है कि यह कदम डिजिटल पेमेंट सेक्टर को फाइनेंशियल रूप से मजबूत बनाएगा। बैंकों और पेमेंट ऐप्स को अब एक रेगुलर रेवेन्यू स्ट्रीम मिलेगा, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और बेहतर हो सकेगा।
शेयर बाजार के लिए राहत
कैपिटल मार्केट में निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि स्टॉक ट्रेडिंग से जुड़े ट्रांजैक्शन पर MDR को काफी कम रखा गया है। SEBI और स्टॉक ब्रोकर एसोसिएशन की बातचीत के बाद इस सेक्टर के लिए दर 0.02% तय की गई है।
अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह बदलाव UPI की तेज रफ्तार को बरकरार रख पाएगा या ट्रांजैक्शन वॉल्यूम पर इसका कोई असर पड़ेगा। निवेशकों के लिए अगले कुछ महीने यह देखना काफी महत्वपूर्ण होगा कि मर्चेंट रिटेंशन और पेमेंट एफिशिएंसी पर इसका कैसा असर होता है।
