छोटे बैंक भी अब क्रेडिट कार्ड मार्केट में छाए! फिनटेक पार्टनरशिप से बढ़ी हिस्सेदारी

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AuthorAditya Rao|Published at:
छोटे बैंक भी अब क्रेडिट कार्ड मार्केट में छाए! फिनटेक पार्टनरशिप से बढ़ी हिस्सेदारी

भारतीय क्रेडिट कार्ड मार्केट में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। छोटे प्राइवेट और स्मॉल फाइनेंस बैंक, जैसे Federal Bank और Utkarsh SFB, फिनटेक कंपनियों के साथ मिलकर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इन बैंकों ने खास तौर पर उन नए ग्राहकों को टारगेट किया है जो पहले सिर्फ UPI या डेबिट कार्ड इस्तेमाल करते थे।

Detailed Coverage

फिनटेक पार्टनरशिप का कमाल

इन बैंकों की सफलता का राज फिनटेक कंपनियों के साथ साझेदारी है। इन पार्टनरशिप्स में, फिनटेक कंपनियाँ ग्राहक जुटाने और मार्केटिंग का काम संभालती हैं, जबकि बैंक रेगुलेटरी और लेंडिंग (lending) का काम देखते हैं। Federal Bank ने OneCard और Scapia जैसी कंपनियों के साथ, और Utkarsh Small Finance Bank ने super.money और PhonePe के साथ मिलकर अपने क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो को काफी बढ़ाया है। इस मॉडल की मदद से ये बैंक बिना किसी बड़े इन्वेस्टमेंट के ज्यादा लोगों तक पहुँच पा रहे हैं।

मार्केट शेयर में बड़ा बदलाव

Equifax के आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2026 में प्राइवेट सेक्टर के बैंकों का क्रेडिट कार्ड मार्केट शेयर बढ़कर 58% हो गया है, जो FY24 में सिर्फ 46% था। वहीं, SBI Cards और BOB Cards जैसी बड़ी कंपनियों का शेयर थोड़ा कम हुआ है। HDFC Bank, ICICI Bank, और Axis Bank अभी भी सबसे बड़े बैंक हैं, लेकिन छोटे बैंकों की इस तेज ग्रोथ से मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ गया है।

शानदार ग्रोथ के आंकड़े

Financial Year 2026 में Federal Bank के क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो में 88% की ग्रोथ देखी गई, जिसमें 10 लाख से ज्यादा नए कार्ड जारी किए गए। इनमें से लगभग 70% कार्ड फिनटेक पार्टनरशिप से आए। Utkarsh Small Finance Bank ने अपने पोर्टफोलियो को लगभग 200% बढ़ाया और करीब 2 लाख नए कार्ड जारी किए। Unity Small Finance Bank ने भी BharatPe के साथ मिलकर 2 लाख से ज्यादा कार्ड जारी किए।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

हालांकि यह ग्रोथ स्ट्रेटेजी छोटे बैंकों के लिए फायदेमंद है, लेकिन कुछ रिस्क भी हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि ये नए-से-क्रेडिट ग्राहक समय पर पेमेंट करते हैं या नहीं, क्योंकि इनका क्रेडिट हिस्ट्री उतना मजबूत नहीं होता। साथ ही, फिनटेक पर निर्भरता का मतलब है कि बैंकों को इन रिश्तों को सावधानी से संभालना होगा। मार्च 2026 तक भारत में कुल क्रेडिट कार्ड की संख्या 11.9 करोड़ तक पहुँच गई है, ऐसे में शेयरहोल्डर्स के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैंक अपनी एसेट क्वालिटी और प्रॉफिट मार्जिन को कैसे मैनेज करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.