2026 BFSI Insight Summit में Fintech लीडर्स ने AI-आधारित पेमेंट के लिए सख्त नियमों की वकालत की है। जैसे-जैसे ऑटोमैटिक प्रोग्राम्स ट्रांजैक्शन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, सुरक्षा, ऑथेंटिकेशन और जवाबदेही (Liability) तय करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
Visa, Amazon Pay और Juspay जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधि हाल ही में 'Business Standard BFSI Insight Summit 2026' में जुटे। यहां मुख्य मुद्दा 'AI-Driven Agentic Payments' का भविष्य था। ये AI एजेंट्स ऐसे सॉफ्टवेयर प्रोग्राम हैं जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के प्रोडक्ट्स की तुलना करने से लेकर खरीदारी पूरी करने तक की क्षमता रखते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा रेगुलेटरी ढांचा इस नई तकनीक से जुड़ी जोखिमों के लिए अभी तैयार नहीं है।
जवाबदेही और ऑडिट ट्रेल का पेच
पैनल का सबसे बड़ा जोर 'अकाउंटेबिलिटी' पर था। जब कोई इंसान पेमेंट करता है, तो ऑथेंटिकेशन साफ होता है, लेकिन AI के मामले में यह जटिल हो जाता है। इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि AI ट्रांजैक्शन के लिए एक ऐसा मजबूत 'ऑडिट ट्रेल' जरूरी है, जो हर लेनदेन को यूजर के शुरुआती निर्देश से जोड़ सके। यह कानूनी जिम्मेदारी (Legal Liability) तय करने के लिए अनिवार्य है, खासकर तब जब कोई गलती हो या अनधिकृत ट्रांजैक्शन हो जाए।
ऑटोमेटेड कॉमर्स की ओर कदम
इंडस्ट्री को उम्मीद है कि यह तकनीक दो चरणों में आएगी। पहले चरण में बिजली बिल या सब्सक्रिप्शन जैसे रूटीन और कम जोखिम वाले पेमेंट होंगे। वहीं, ट्रैवल बुकिंग जैसे जटिल कामों में समय लगेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि AI के लिए 'गार्डरेल्स' (Guardrails) बनाना जरूरी है, ताकि यूजर अपने खर्च की सीमा तय कर सके और AI उन दायरे में ही काम करे।
UPI और रेगुलेटर्स की भूमिका
भारतीय पेमेंट इकोसिस्टम के लिए, जो काफी हद तक UPI पर निर्भर है, RBI और NPCI के नए दिशानिर्देश गेम-चेंजर साबित होंगे। डेवलपर्स अब AI की इंटेलिजेंस लेयर को पेमेंट प्रोटोकॉल से अलग रखने की वकालत कर रहे हैं। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI सुरक्षा आर्किटेक्चर को कैसे आकार देते हैं ताकि यूजर का डेटा और पैसा सुरक्षित रहे।
