Fino Payments Bank का SFB बनने का प्लान
Fino Payments Bank अपनी रणनीति के तहत एक डिजिटल, एसेट-लाइट स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) में बदलने की कोशिश कर रही है। इस योजना का मुख्य फोकस सिक्योर्ड लेंडिंग (secured lending) पर है, ताकि होम लोन, गोल्ड लोन और बिजनेस लोन जैसे प्रोडक्ट की रेंज बढ़ाई जा सके। बैंक फिजिकल ब्रांच पर निर्भर रहने के बजाय, डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच अपना रही है। मार्च 2026 में बैंक ने रिकॉर्ड मंथली डिपॉजिट बैलेंस दर्ज किया और मार्च तिमाही में लोन रेफरल बिजनेस में 96% की तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ देखी, जिसमें ₹600 करोड़ का लोन बांटा गया।
हालांकि, Fino के शेयर में पिछले एक साल में लगभग 48% की गिरावट आई है, और यह ₹126.22 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। यह प्रदर्शन स्मॉल फाइनेंस बैंक सेक्टर के मुकाबले काफी कमजोर है, जहां FY26 में लोन पोर्टफोलियो ग्रोथ 20% से अधिक रही।
प्रतिस्पर्धियों का मजबूत प्रदर्शन
AU Small Finance Bank (AUBANK) और Equitas Small Finance Bank (EQUIBF) जैसे प्रतिस्पर्धी मजबूत वित्तीय नतीजे पेश कर रहे हैं। AU Small Finance Bank ने FY26 में ₹2,641 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले साल से 25% ज्यादा है, और उनका एसेट मैनेजमेंट (AUM) ₹1.40 लाख करोड़ रहा। AU Small Finance Bank का P/E रेश्यो लगभग 28.80 है, जो Fino के P/E रेंज 16.13-18.79 से काफी ज्यादा है। Equitas Small Finance Bank का Q4 FY26 नेट प्रॉफिट पांच गुना बढ़कर ₹213 करोड़ रहा, जबकि ग्रॉस एडवांसेज 22% बढ़े। Fino का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1,050-1,120 करोड़ है, जो AU Small Finance Bank के करीब ₹80,000 करोड़ के मुकाबले काफी छोटा है। Fino का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) लगभग 7.37% से 10.78% के बीच है, जो पीयर्स की तुलना में कम है।
CEO के कानूनी मामले ने बढ़ाई चिंता
Fino Payments Bank के लिए सबसे बड़ी चिंता उसके MD & CEO, ऋषि गुप्ता से जुड़ा नेतृत्व संकट है। उन्हें 27 फरवरी, 2026 को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ GST इंटेलिजेंस (DGGI) ने ऑनलाइन गेमिंग ट्रांजैक्शन और शेल एंटिटीज से जुड़े GST चोरी के एक मामले में गिरफ्तार किया था।
Fino का कहना है कि जांच बाहरी प्रोग्राम मैनेजरों और व्यापारियों पर केंद्रित है, न कि बैंक के अनुपालन पर। गुप्ता को 27 मार्च, 2026 को जमानत मिल गई थी, लेकिन इस घटना ने बैंक की प्रतिष्ठा और कामकाज पर गहरा असर डाला है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अब गुप्ता के लीडरशिप रोल के लिए 'फिट एंड प्रॉपर' स्टेटस की समीक्षा कर रहा है। इसी के चलते, बैंक के बोर्ड ने 26 मार्च, 2026 को उनकी पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को वापस ले लिया था, जो रेगुलेटरी मंजूरी पर निर्भर करेगा। इस गवर्नेंस अनिश्चितता को एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों के तहत जांच की अटकलों से और बढ़ावा मिला है।
Fino का P/E रेश्यो लगभग 16.13 है, जो सेक्टर के औसत P/E 9.99 से काफी ऊपर है, जिससे संकेत मिलता है कि गवर्नेंस मुद्दों के कारण इसके वैल्यूएशन पर सवाल उठ सकते हैं। इस कानूनी अनिश्चितता के चलते मार्च 2026 के अंत से पहले के महीने में बैंक के शेयर में पहले ही लगभग 40% की गिरावट आ चुकी थी।
एनालिस्ट की राय और भविष्य के टारगेट
नेतृत्व की उथल-पुथल के बावजूद, एनालिस्ट आम तौर पर Fino Payments Bank के लिए 'Buy' रेटिंग बनाए हुए हैं, जिनके प्राइस टारगेट ₹300 से ₹390 INR के बीच हैं। औसत एक साल का प्राइस टारगेट लगभग ₹351.90 है। अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए बैंक का अनुमानित EPS ₹11.10 है।
मैनेजमेंट SFB रूपांतरण रणनीति के प्रति प्रतिबद्ध है, जिसका लक्ष्य FY30 तक ₹10,000 करोड़ का AUM और 20% से अधिक ROE हासिल करना है। यह लक्ष्य सिक्योर्ड लेंडिंग और डिजिटल मोमेंटम पर 90% फोकस पर आधारित है। हालांकि, इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करना Fino की लीडरशिप और रेगुलेटरी चुनौतियों को प्रभावी ढंग से और तुरंत हल करने पर बहुत हद तक निर्भर करेगा।
