Fino Payments Bank ने स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) में अपने ट्रांजिशन को लेकर बड़ी डेडलाइन तय की है। दिसंबर 2025 में मिली RBI की मंजूरी के बाद, बैंक अब अपने तकनीकी और गवर्नेंस ढांचे को बदलने में जुटा है।
ट्रांजिशन की तैयारी और नेतृत्व में बदलाव
Fino Payments Bank अब अपने पारंपरिक पेमेंट बैंक मॉडल से आगे बढ़कर एक पूर्ण स्मॉल फाइनेंस बैंक बनने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने केतन मर्चेंट को अंतरिम CEO के पद पर 3 महीने का और विस्तार दिया है, जो अगस्त 2026 से प्रभावी है। बैंक इस जटिल प्रक्रिया के लिए कंसल्टिंग फर्म PricewaterhouseCoopers के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि 2027 की शुरुआत तक नई लोन ओरिजिनेशन और मैनेजमेंट सिस्टम तैयार हो सकें।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस और ग्रोथ
बैंक भले ही अपने ट्रांजिशन पर फोकस कर रहा हो, लेकिन निवेशकों की नजर उसके मौजूदा फाइनेंशियल हेल्थ पर भी है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी ने ₹13.7 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि रेफरल लोन डिस्बर्समेंट में 214% की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है और यह आंकड़ा ₹628 करोड़ पर पहुंच गया है। बैंक का नेट रेवेन्यू मार्जिन भी रिकॉर्ड 42.8% रहा है।
चुनौतियां और बाजार की स्थिति
स्मॉल फाइनेंस बैंक बनने की यह राह आसान नहीं है। बैंक के सामने सीमित 18 महीने के रेगुलेटरी विंडो के भीतर नई टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल मॉडल को लागू करने का बड़ा रिस्क है। इसके अलावा, बैंकिंग सेक्टर में कॉम्पिटिशन भी बहुत ज्यादा है। बैंक को अपनी लागत को कम रखते हुए बिजनेस को स्केल करना होगा, तभी वह बड़े बैंकों और मौजूदा स्मॉल फाइनेंस बैंकों के बीच अपनी जगह बना पाएगा। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बैंक अपने लोन ग्रोथ के साथ-साथ मुनाफे को भी पटरी पर ला पाएगा।
