Fino Payments Bank के शेयरों में आज जबरदस्त तेजी देखी गई, जिससे स्टॉक **13%** बढ़कर **₹153** पर पहुंच गया। यह उछाल कंपनी के जून महीने के शानदार बिजनेस अपडेट के बाद आया है। कंपनी ने कुल खातों में **31%** की वृद्धि और लोन रेफरल डिस्बर्सल में **253%** की भारी बढ़ोतरी दर्ज की है।
खातों की संख्या बढ़ी, डिजिटल हुआ और मजबूत
Fino Payments Bank ने अपने ग्राहकों की संख्या में जबरदस्त इजाफा किया है। जून 2026 तक बैंक के कुल खातों की संख्या बढ़कर 1.8 करोड़ हो गई है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 31% ज्यादा है। अकेले जून महीने में ही 3.1 लाख से ज्यादा नए खाते खोले गए, जो बैंक की बेसिक बैंकिंग सेवाओं की लगातार मांग को दर्शाता है।
डिजिटल मोर्चे पर भी बैंक ने अच्छी तरक्की की है। FinoPay मोबाइल एप्लीकेशन के एक्टिव यूजर्स की संख्या 38% बढ़कर 8.4 लाख हो गई है। यह डिजिटल ग्रोथ बैंक के बिजनेस मॉडल को स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) में बदलने की योजना के लिए बेहद अहम है।
लोन रेफरल में रिकॉर्ड तोड़ उछाल
इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा आकर्षण बैंक का लोन रेफरल बिजनेस रहा, जो इसके स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) बनने की तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। रेफरल लोन डिस्बर्सल में 253% का जोरदार उछाल आया और यह लगभग ₹240 करोड़ तक पहुंच गया। इससे साफ है कि बैंक अपने मौजूदा ग्राहक आधार का इस्तेमाल करके क्रेडिट बिजनेस को तेजी से बढ़ा रहा है।
स्मॉल फाइनेंस बैंक में बदलाव की राह
बैंक फिलहाल स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) बनने की तैयारी में जुटा है और इसके लिए उसे दिसंबर 2025 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। लोन रेफरल में मिल रही ग्रोथ इस बदलाव के लिए एक अच्छा संकेत है। हालांकि, बैंक अपने पेमेंट प्रोसेसिंग वॉल्यूम में आई गिरावट को भी संभाल रहा है। पिछले साल की तुलना में बैंक द्वारा प्रोसेस किए गए पेमेंट्स का कुल मूल्य 35% कम हो गया है। कंपनी का कहना है कि यह गिरावट इसलिए आई है क्योंकि लोग कैश ट्रांजैक्शन से हटकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, बैंक अब क्वालिटी मर्चेंट्स पर ज्यादा फोकस कर रहा है, जिससे थोड़े समय के लिए ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में कमी आ सकती है। मैनेजमेंट का मानना है कि इस गिरावट की रफ्तार धीमी पड़ रही है, जो यह संकेत दे सकता है कि पेमेंट बिजनेस अब स्थिर होने की कगार पर है।
निवेशकों के लिए अहम बातें
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि बैंक SFB में बदलने के इस महंगे ट्रांजिशन के दौरान अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रखेगा। लोन रेफरल बिजनेस भले ही तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन लेंडिंग ऑपरेशन्स को बढ़ाने के लिए प्योर पेमेंट बैंक मॉडल की तुलना में अलग तरह के कैपिटल और रिस्क मैनेजमेंट की जरूरत होगी। बैंक अपने बड़े ग्राहक आधार को प्रॉफिटेबल लोन क्लाइंट्स में बदलने में कितना कामयाब रहता है, यह आने वाली तिमाहियों में बड़ा फैक्टर साबित होगा। निवेशकों को SFB के लिए जरूरी फाइनल रेगुलेटरी लाइसेंस मिलने की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, पेमेंट प्रोसेसिंग वॉल्यूम के स्थिर होने के संकेत पर भी ध्यान देना होगा। शेयर में हाल में अच्छी तेजी दिखी है, लेकिन भविष्य की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि SFB ट्रांजिशन कितना सफल होता है और लोन बुक की क्वालिटी कैसी रहती है।
